कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रियल एस्टेट कारोबार में निवेश करने वालों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। एक परिवार ने कुख्यात अपराधी विकास दुबे के कथित गुर्गे उमेश दुबे पर प्लॉटिंग के नाम पर 30 लाख रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें जमीन के कारोबार में साझेदारी और मोटे मुनाफे का सपना दिखाया गया। भरोसा जीतने के बाद उनसे लाखों रुपये ले लिए गए, लेकिन न तो प्लॉटिंग का काम शुरू हुआ और न ही उनकी रकम वापस की गई। अब परिवार का आरोप है कि पैसा मांगने पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और न्याय के लिए वे लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।पीड़ित प्रांजुल शुक्ला ने बताया कि उनके परिवार को प्लॉटिंग के कारोबार में निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया था। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि इस निवेश से अच्छा लाभ मिलेगा और जल्द ही परियोजना शुरू कर दी जाएगी। परिवार ने विश्वास कर अपनी वर्षों की मेहनत की कमाई इस परियोजना में लगा दी।प्रांजुल का आरोप है कि उनकी रकम से जमीन की खरीद तो कर ली गई, लेकिन इसके बाद न तो प्लॉटिंग का विकास कार्य शुरू हुआ और न ही निवेशकों को कोई जानकारी दी गई। जब परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।
इलाज के लिए बेचा था प्लॉट, वही रकम भी फंस गई
पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। परिवार के मुखिया सुशील कुमार शुक्ला के इलाज में करीब 20 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। इसके बाद कर्ज चुकाने और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें अपना एक प्लॉट भी बेचना पड़ा।परिवार का कहना है कि उसी प्लॉट से मिली रकम को भविष्य की बेहतर आर्थिक स्थिति की उम्मीद में प्लॉटिंग परियोजना में निवेश किया गया था, लेकिन अब वही पैसा कथित तौर पर फंस गया है। इससे पूरे परिवार पर आर्थिक संकट और गहरा गया है।
‘पैसा मांगो तो मिलती है धमकी’
प्रांजुल शुक्ला का आरोप है कि जब भी उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, उन्हें धमकियां दी गईं। उनका कहना है कि आरोपी कथित तौर पर जान से मारने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देता है। इन धमकियों के कारण पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।परिवार का कहना है कि वे सिर्फ अपनी मेहनत की कमाई वापस चाहते हैं, लेकिन अब उन्हें अपनी सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है।

पिता गहरे अवसाद में, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पीड़ित परिवार का कहना है कि लाखों रुपये फंसने का सबसे ज्यादा असर परिवार के मुखिया सुशील कुमार शुक्ला पर पड़ा है। आर्थिक नुकसान और लगातार तनाव के कारण वह गहरे मानसिक अवसाद में चले गए हैं।परिवार का कहना है कि जिस रकम से वे अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते थे, वही रकम अब उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार का दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
उच्च अधिकारियों से शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
प्रांजुल शुक्ला के अनुसार, उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से की है। उन्होंने लिखित रूप से पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।परिवार का आरोप है कि शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे उनका प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। उनका दावा है कि निवेश से जुड़े सभी लेन-देन और अन्य दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी रकम वापस दिलाई जाए, आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोप एक पक्ष के दावे पर आधारित हैं। संबंधित आरोपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस या प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना पूरी कानूनी और वित्तीय जांच-पड़ताल के बड़े निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी भूमि या प्लॉटिंग परियोजना में निवेश से पहले सभी दस्तावेजों, स्वामित्व, सरकारी स्वीकृतियों और कानूनी स्थिति की पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानियों से बचा जा सके।अब पीड़ित परिवार की निगाहें प्रशासन और कानून व्यवस्था पर टिकी हैं। उनका कहना है कि उन्हें केवल अपनी मेहनत की कमाई वापस चाहिए और वे उम्मीद कर रहे हैं कि निष्पक्ष जांच के बाद उन्हें न्याय मिलेगा।
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