राम मंदिर चढ़ावा केस में बड़ा मोड़! टिन्नू-मनीष की 7 दिन की पुलिस रिमांड पर आज कोर्ट का अहम फैसला, जांच में खुल सकते हैं कई राज

Editorial
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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आने वाला है। मामले की जांच कर रही पुलिस ने जेल में बंद दो आरोपियों रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग अदालत से की है। इस आवेदन पर आज विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में सुनवाई होगी। माना जा रहा है कि यदि अदालत पुलिस की मांग स्वीकार करती है तो जांच एजेंसियों को इस चर्चित मामले की कई अहम कड़ियां जोड़ने का अवसर मिलेगा।यह मामला पहले ही प्रदेश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में आज की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

जेल में पूछताछ के बाद पुलिस ने बढ़ाया अगला कदम

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को विवेचक ने जिला कारागार पहुंचकर आरोपी टिन्नू यादव और मनीष यादव से पूछताछ की। दोनों के बयान दर्ज किए गए और उनसे मामले के विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए गए।इन्हीं बयानों के आधार पर विवेचक ने अदालत में पुलिस कस्टडी रिमांड का आवेदन दाखिल किया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों की सत्यता का परीक्षण करना आवश्यक है। इसके लिए दोनों को पुलिस हिरासत में लेकर घटनास्थलों का सत्यापन, बरामदगी और अन्य आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कराई जानी है।

7 दिन की रिमांड क्यों चाहती है पुलिस?

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले की कई अहम कड़ियां अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई हैं। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान—

  • आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
  • कथित धनराशि के लेनदेन की जांच होगी।
  • अन्य संदिग्धों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कराई जाएगी।
  • यदि आवश्यकता हुई तो घटनास्थलों पर ले जाकर सत्यापन कराया जाएगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और दस्तावेजों का मिलान कराया जाएगा।
  • बरामदगी और बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा।

इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने अदालत से सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की है।

अदालत में दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क

विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किए गए आवेदन पर विशेष अभियोजन अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने जेल में विवेचक के समक्ष महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। इन बयानों की पुष्टि और आगे की विवेचना के लिए पुलिस कस्टडी आवश्यक है।वहीं आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे लीगल एड डिफेंस काउंसिल डिप्टी चीफ कुल शेखर सिंह ने विवेचक द्वारा दाखिल किए गए रिमांड आवेदन की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की और नियमानुसार सुनवाई की बात कही।अब अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाएगी कि पुलिस को कितनी अवधि की कस्टडी दी जाए।

बरामद धनराशि भी अदालत में पेश

गुरुवार को सुनवाई के दौरान विवेचक ने अदालत के समक्ष दो अन्य आरोपियों सुभाष श्रीवास्तव और रमा शंकर मिश्रा के पास से बरामद धनराशि और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।बताया गया कि बरामद रकम लगभग 10 से 12 हजार रुपये है। अदालत ने बरामद धनराशि और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद उन्हें विवेचना में शामिल करने के लिए विवेचक की सुपुर्दगी में देने का आदेश पारित किया।जांच अधिकारी अब इन बरामद सामानों को भी केस डायरी और अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर आगे की जांच करेंगे।

अब तक छह आरोपी जा चुके हैं पुलिस रिमांड पर

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 26 जून से जिला कारागार में बंद कुल आठ आरोपियों में से अब तक छह आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा चुकी है।अब तक की कार्रवाई के अनुसार—

  • अविनाश शुक्ला से लगभग 13 घंटे पूछताछ हुई।
  • लवकुश, अनुकल्प और करुणेश को लगभग 40 घंटे की पुलिस कस्टडी मिली।
  • सुभाष श्रीवास्तव और रमा शंकर मिश्रा को 14 घंटे की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।

अब केवल टिन्नू यादव और मनीष यादव की पुलिस कस्टडी रिमांड पर फैसला होना बाकी है।

क्या खुल सकते हैं नए राज?

जांच एजेंसियों का मानना है कि टिन्नू यादव और मनीष यादव से पुलिस हिरासत में पूछताछ होने पर कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से धन के प्रवाह, कथित भूमिका, अन्य लोगों से संपर्क और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।हालांकि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और मामले में सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही तय होंगे।

आज की सुनवाई पर टिकी हैं सबकी नजरें

शुक्रवार को होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले में अहम मानी जा रही है। यदि अदालत सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर करती है, तो जांच एजेंसियों को आरोपियों से गहन पूछताछ का अवसर मिलेगा। वहीं, यदि रिमांड अवधि कम होती है या आवेदन खारिज होता है, तो जांच की रणनीति पर भी उसका असर पड़ सकता है।फिलहाल अयोध्या के इस चर्चित मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी। आज की सुनवाई से यह तय होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पुलिस उन सवालों के जवाब तक पहुंच पाती है, जिनका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है।

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