मुरादाबाद ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने रेस्क्यू और निगरानी अभियान तेज कर दिया है। इसी अभियान के तहत ग्राम सरकड़ा परम में एक वयस्क नर तेंदुए को ट्रैप केज की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। तेंदुए के रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने संवेदनशील गांवों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। क्षेत्र में अब तक कुल 21 ट्रैपिंग केज लगाए जा चुके हैं।
सरकड़ा परम में ट्रैप केज में फंसा तेंदुआ
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के निर्देश पर ठाकुरद्वारा क्षेत्र में मानव-तेंदुआ संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तेंदुए की गतिविधियों वाले इलाकों में विशेष निगरानी की जा रही है।इसी क्रम में ग्राम सरकड़ा परम में एक वयस्क नर तेंदुए को ट्रैप केज के माध्यम से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की।तेंदुए की मौजूदगी वाले अन्य क्षेत्रों में भी रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत किया गया है। लौंगी खुर्द, कोठा महदूद और शिव नगर में नए ट्रैप केज लगाए गए हैं। वन विभाग के मुताबिक ठाकुरद्वारा तहसील के तेंदुआ संवेदनशील क्षेत्रों में अब तक 21 ट्रैपिंग केज लगाए जा चुके हैं।

खेत और आबादी के बीच लगाए गए ANIDER डिवाइस
मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने तकनीकी निगरानी का भी सहारा लिया है। लालापुर पीपलसाना और लालपुर गोसाई में खेत और आबादी के बीच दो स्थानों पर ANIDER डिवाइस लगाए गए हैं।वन विभाग के अनुसार, किसी जानवर के डिवाइस के पास पहुंचने पर इससे ध्वनि उत्पन्न होती है। इससे संबंधित क्षेत्र में निगरानी रखने और लोगों को सतर्क करने में मदद मिलती है। संवेदनशील इलाकों में इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी समय रहते जुटाना और संभावित खतरे को कम करना है।

गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को भी लगातार जागरूक किया जा रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की ‘बाघ मित्र एक्सप्रेस’ टीम ने वन विभाग के साथ मिलकर कई गांवों में जागरूकता अभियान चलाया।टीम गक्खरपुर, काजीपुरा, चटकाली, कोठा महमूद, पांयदापुर और रायभुड़ समेत विभिन्न गांवों में पहुंची। यहां ग्रामीणों को तेंदुए की मौजूदगी के दौरान सावधानी बरतने, अकेले खेतों में न जाने और वन्यजीव दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के संबंध में जानकारी दी गई।वन विभाग का प्रचार-प्रसार वाहन भी संवेदनशील गांवों में लगातार घूम रहा है। लाउडस्पीकर और जनसंपर्क के माध्यम से ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल विभाग को देने की अपील की जा रही है।
थर्मल स्कैनिंग से भी हो रही निगरानी
जिन गांवों से तेंदुए के दिखाई देने या उसकी गतिविधियों की सूचना मिल रही है, वहां वन विभाग की रेस्क्यू टीमें नियमित गश्त कर रही हैं। रात के समय विशेष सतर्कता बरती जा रही है। टीमों द्वारा थर्मल स्कैनिंग के माध्यम से भी संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।वन विभाग ने आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया है। इसके अलावा वाइल्डलाइफ एसओएस और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और निगरानी में सहयोग कर रही हैं।वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय निदेशक, मुरादाबाद ने भी ठाकुरद्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चुनौती
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई खेतों में पानी भर गया है। ऐसे में तेंदुओं के अपने सामान्य ठिकानों से निकलकर रात के समय सूखे और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों की ओर आने की संभावना बढ़ जाती है।इसी वजह से नदी और जलभराव वाले इलाकों के आसपास स्थित गांवों में विशेष निगरानी की जा रही है। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और ग्रामीणों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
ग्रामीणों की सुरक्षा पर वन विभाग का फोकस
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने साफ किया है कि अभियान लगातार जारी रहेगा। ट्रैपिंग केज, थर्मल स्कैनिंग, गश्त, जागरूकता अभियान और तकनीकी उपकरणों के जरिए निगरानी को मजबूत किया गया है।सरकड़ा परम में वयस्क नर तेंदुए के रेस्क्यू के बाद वन विभाग की सक्रियता और बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील गांवों में किसी भी तरह की सूचना को गंभीरता से लिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू कार्रवाई की जाएगी।वहीं ग्रामीणों से अपील की गई है कि तेंदुआ दिखाई देने पर उसके करीब जाने, भीड़ लगाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें। वन विभाग को सूचना देकर सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही सबसे बेहतर उपाय है। बदलते मौसम और रामगंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आने वाले दिनों में भी मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुआ निगरानी अभियान जारी रहने की संभावना है।
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