लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरोपी सुरेंद्र साहू को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साहू की जमानत मंजूर करते हुए अहम टिप्पणी की कि प्रथमदृष्टया वह उस इमारत का मालिक नहीं, बल्कि तीसरी मंजिल पर रहने वाला किरायेदार था। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आग लगने के समय आरोपी परिसर में मौजूद नहीं था।22 जून को हुए इस अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद मामले ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था और भवनों में अग्निशमन इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के साथ-साथ भवन के मालिक, किरायेदारों और सुरक्षा मानकों की जिम्मेदारी को लेकर भी जांच आगे बढ़ी।
हाईकोर्ट ने किन बातों को माना अहम?
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर किया। अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि सुरेंद्र साहू इमारत का मालिक नहीं था। वह तीसरी मंजिल पर किरायेदार के तौर पर रह रहा था।अदालत ने यह भी देखा कि जिस समय आग लगी, उस दौरान साहू परिसर में मौजूद नहीं था। इसके अलावा घटना वाले दिन उसके किराए वाले हिस्से में ताला लगा होने की बात भी सामने आई।इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत प्रदान कर दी। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपी को मामले के सभी आरोपों से बरी कर दिया है। मामले में अंतिम दोष या निर्दोषता का फैसला मुकदमे की आगे की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

चैनल गेट पर ताले का था आरोप
सुरेंद्र साहू पर आरोप था कि उसके किराये वाले हिस्से के बाहर लगे चैनल गेट पर ताला लगा हुआ था। अभियोजन पक्ष की ओर से यह तर्क सामने आया कि यदि यह गेट खुला होता तो आग लगने के दौरान लोगों को बाहर निकलने में आसानी हो सकती थी और संभवतः कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी।यही आरोप मामले में सुरेंद्र साहू की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय आरोपी की भूमिका, उसके किरायेदार होने और घटना के समय परिसर में मौजूद नहीं होने जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा।
इमारत की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
अदालत की टिप्पणी में इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया कहा कि इमारत के मालिक की ओर से अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम पर्याप्त नहीं थे।यह पहलू अलीगंज अग्निकांड को केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रखता, बल्कि शहर में भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। खासकर ऐसी इमारतों में जहां बड़ी संख्या में लोग रहते या काम करते हैं, आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के रास्ते, फायर सेफ्टी उपकरण और आपातकालीन इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

बाहर निकलने का सिर्फ एक रास्ता होने की बात
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर भी गौर किया कि प्रथमदृष्टया इमारत से बाहर निकलने के लिए केवल एक रास्ता उपलब्ध था। किसी भी बहुमंजिला इमारत में आग जैसी आपात स्थिति के दौरान निकासी के पर्याप्त रास्ते नहीं होना लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।अलीगंज हादसे के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या संबंधित भवन में आपातकालीन निकासी की व्यवस्था नियमों के अनुरूप थी। अदालत की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि भवन की संरचना और अग्नि सुरक्षा इंतजाम मामले की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
15 लोगों की मौत से दहल गया था लखनऊ
22 जून को हुए अलीगंज अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर दिया था। आग की घटना में 15 लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य चलाया गया तथा मामले की जांच शुरू हुई।घटना ने प्रशासन के सामने यह सवाल भी खड़ा किया कि शहर में संचालित इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की निगरानी किस तरह की जा रही है। हादसे के बाद जर्जर और असुरक्षित इमारतों की पहचान तथा भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हुई हैं।
मालिक और किरायेदार की जिम्मेदारी पर बहस
अलीगंज अग्निकांड में हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एक अहम कानूनी सवाल भी सामने आता है कि किसी भवन में हादसा होने पर मालिक और किरायेदार की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जा सकती है।आमतौर पर भवन की मूल संरचना और अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जिम्मेदारी से संबंधित दस्तावेज, नियम और वास्तविक परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। वहीं किसी किरायेदार की भूमिका का आकलन उसके कब्जे वाले हिस्से, किए गए बदलाव और घटना से जुड़े प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।इस मामले में भी अदालत ने जमानत देते समय आरोपी के किरायेदार होने और घटना के समय उसके मौके पर मौजूद नहीं होने को महत्वपूर्ण परिस्थितियों में शामिल किया।
जमानत के बाद भी जांच और मुकदमा जारी रहेगा
सुरेंद्र साहू को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। मामले में सामने आए आरोपों, जांच और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण आगे न्यायिक प्रक्रिया में किया जाएगा।अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर लखनऊ में भवनों की अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी में जहां आरोपी किरायेदार की भूमिका को लेकर राहत मिली है, वहीं भवन मालिक और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं पर अदालत की प्रथमदृष्टया टिप्पणी मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
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