आजमगढ़ उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले आजमगढ़ से सामने आए एक विवाद ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी के एक बूथ अध्यक्ष राहुल यादव ने पार्टी के ही गोपालपुर से विधायक नफीस अहमद के समर्थकों पर कथित मारपीट, गाली-गलौज और अभद्रता के आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।ओपी राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भोजपुरी अंदाज में अखिलेश यादव को घेरते हुए सवाल उठाया कि आखिर पार्टी के कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट के मामले पर सपा नेतृत्व चुप क्यों है। राजभर ने आजमगढ़ के घटनाक्रम को लेकर अखिलेश यादव की कार्यशैली और पार्टी नेतृत्व पर कई सवाल खड़े किए।
सपा बूथ अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
मामला आजमगढ़ के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता राहुल यादव, जो खुद को समाजवादी पार्टी का बूथ अध्यक्ष बताते हैं, ने विधायक नफीस अहमद के समर्थकों पर मारपीट और गाली-गलौज के आरोप लगाए हैं।राहुल यादव के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर एक सर्वे चल रहा था। इस सर्वे में उन्होंने विधायक नफीस अहमद की जगह समाजवादी पार्टी के किसी दूसरे नेता को अपनी पसंद बताया था। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ।शिकायतकर्ता का दावा है कि इसके बाद उन्हें फोन किया गया और कथित तौर पर गाली-गलौज की गई। मामले को स्पष्ट करने के लिए जब वह सैदपुर पहुंचे तो वहां विधायक के समर्थकों ने उन्हें रोक लिया। राहुल यादव का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई।

विधायक पर भी लगाया गया आरोप
राहुल यादव ने अपने आरोपों में दावा किया है कि जिस समय विवाद हुआ, उस दौरान विधायक नफीस अहमद भी मौके पर मौजूद थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने कथित मारपीट को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विधायक या उनके समर्थकों की ओर से इस पूरे मामले पर क्या पक्ष सामने आता है, यह भी इस विवाद में महत्वपूर्ण होगा। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा
मामला राजनीतिक रूप लेने के बाद ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकर्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट होने के बावजूद पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि आखिर वह कब तक चुप रहेंगे। उन्होंने सपा के अंदर कथित तौर पर चल रही गुटबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच विवाद को लेकर भी हमला बोला।राजभर का कहना है कि चुनाव करीब हैं और ऐसे मामलों का राजनीतिक असर पड़ सकता है। उन्होंने आजमगढ़ के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का जिक्र करते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।

‘मुसलमान प्रेम’ को लेकर राजभर का हमला
ओपी राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव की मुस्लिम राजनीति को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के कथित व्यवहार पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।राजभर ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। हालांकि, उनके बयान में इस्तेमाल किए गए राजनीतिक आरोपों को उनके राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो चुनावी माहौल में किसी पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और नेतृत्व की प्रतिक्रिया का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए हमला करने का मौका बन सकता है।
सोशल मीडिया सर्वे बना विवाद की वजह?
पूरे विवाद में सोशल मीडिया पर चल रहे कथित सर्वे का भी जिक्र सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने सर्वे में विधायक नफीस अहमद की जगह किसी दूसरे सपा नेता को अपनी पहली पसंद बताया था।अगर शिकायतकर्ता के आरोपों को आधार माना जाए तो इसी राजनीतिक पसंद को लेकर विवाद बढ़ा। यह मामला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर चलने वाले स्थानीय राजनीतिक सर्वे और समर्थकों की प्रतिक्रियाएं किस तरह पार्टी के अंदर तनाव का कारण बन सकती हैं।हालांकि यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि केवल किसी सर्वे में पसंद व्यक्त करना किसी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा या धमकी को सही नहीं ठहराता। पूरे मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई और निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।
महराजगंज थाने में शिकायत का दावा
राहुल यादव की ओर से मामले को लेकर महराजगंज थाने में शिकायत दिए जाने की बात कही गई है। अब पुलिस के स्तर पर शिकायत की जांच और दोनों पक्षों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों को लेकर कोई अन्य तथ्य सामने आता है तो पुलिस जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
चुनाव से पहले आजमगढ़ की सियासत गरमाई
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले सपा के भीतर किसी स्थानीय विवाद का सामने आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा सकता है।ओपी राजभर द्वारा इस मुद्दे को सीधे अखिलेश यादव से जोड़कर उठाए जाने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। विपक्षी नेता अब इस घटना को सपा की आंतरिक राजनीति और कार्यकर्ताओं की स्थिति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम में सपा विधायक नफीस अहमद और उनके समर्थकों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अब किसके जवाब का इंतजार?
आजमगढ़ के इस विवाद में फिलहाल तीन स्तर पर नजर बनी हुई है—पुलिस की जांच, सपा विधायक का पक्ष और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया। राहुल यादव की शिकायत के बाद यदि पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ाती है तो मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।वहीं ओपी राजभर के हमले ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। चुनावी माहौल में आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सपा के बूथ अध्यक्ष द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोप और ओपी राजभर के अखिलेश यादव पर हमले ने आजमगढ़ की सियासत को गरमा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में क्या सामने आता है और समाजवादी पार्टी इस पूरे विवाद पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।
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