बदायूं में सेफ फ्यूचर 3.0 अभियान, स्कूली वाहनों की होगी जांच

Editorial
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रिपोर्ट :मो अरशद

बदायूं स्कूली बच्चों के सुरक्षित यातायात को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। शासन और जिलाधिकारी बदायूं के निर्देश पर जिले में ‘सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान के तहत स्कूली वाहनों की विशेष जांच की जाएगी। यह विशेष चेकिंग अभियान 14 सितंबर 2026 से 19 सितंबर 2026 तक चलेगा। अभियान के दौरान स्कूलों में संचालित वाहनों की फिटनेस, परमिट और यांत्रिक स्थिति की गहन जांच की जाएगी।परिवहन विभाग का उद्देश्य स्कूली बच्चों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने वाले वाहन सड़क पर चलने की स्थिति में पूरी तरह सुरक्षित हों। किसी वाहन में तकनीकी खराबी या यांत्रिक कमी मिलने पर संबंधित स्कूल प्रशासन को आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए जाएंगे।

चार टीमों का किया जाएगा गठन

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन/प्रशासन) हरिओम ने बताया कि ‘सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए परिवहन विभाग बदायूं की ओर से चार टीमों का गठन किया जाएगा।ये टीमें जिले के अलग-अलग स्कूलों में जाकर वहां संचालित स्कूली वाहनों की जांच करेंगी। जांच के दौरान वाहनों की केवल कागजी स्थिति ही नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक यांत्रिक स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।टीम यह देखेगी कि स्कूल बस, वैन या बच्चों के आवागमन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अन्य वाहनों की फिटनेस वैध है या नहीं। साथ ही वाहन के आवश्यक दस्तावेज और परमिट की स्थिति की भी जांच की जाएगी।

बदायूं में सेफ फ्यूचर 3.0 अभियान
बदायूं में सेफ फ्यूचर 3.0 अभियान

वाहनों की यांत्रिक स्थिति पर विशेष नजर

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अभियान में वाहनों की यांत्रिक स्थिति को सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल किया गया है। परिवहन विभाग की टीमें यह जांच करेंगी कि वाहन तकनीकी रूप से स्वस्थ है या नहीं।वाहन में किसी तरह की गंभीर यांत्रिक कमी मिलने पर उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित स्कूल प्रशासन को वाहन में आवश्यक सुधार कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा। विभाग का प्रयास रहेगा कि बच्चों को ऐसे वाहन से यात्रा न करनी पड़े, जिसकी तकनीकी स्थिति सुरक्षित संचालन के अनुकूल न हो।अधिकारियों के अनुसार स्कूली वाहनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

खराब वाहनों पर होगी सुधारात्मक कार्रवाई

अभियान के दौरान यदि किसी स्कूल में संचालित वाहन की यांत्रिक स्थिति खराब पाई जाती है तो संबंधित स्कूल प्रशासन को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जाएंगे।स्कूल संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच में सामने आई कमियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दूर कराया जाए। यदि वाहन की कमियों को दूर नहीं किया जाता है और नियमों का पालन नहीं होता है तो परिवहन विभाग की ओर से प्रवर्तन की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।इससे साफ है कि विभाग केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे भी निगरानी रखी जाएगी।

फिटनेस और परमिट की होगी जांच

‘सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान के दौरान स्कूली वाहनों की फिटनेस और परमिट की भी जांच की जाएगी। परिवहन विभाग यह देखेगा कि स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों के जरूरी दस्तावेज पूरे हैं या नहीं।जिन वाहनों के प्रपत्र अधूरे होंगे, उनके संचालकों को आवश्यक दस्तावेज पूरे कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा। विभाग ने स्कूल संचालकों और वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे अभियान शुरू होने से पहले ही अपने वाहनों की फिटनेस करा लें और सभी जरूरी प्रपत्रों को पूरा कर लें।

पुलिस और शिक्षा विभाग का भी मिलेगा सहयोग

बदायूं में चलने वाला यह विशेष अभियान केवल परिवहन विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी बदायूं का भी संयुक्त सहयोग लिया जाएगा।इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के सुरक्षित आवागमन से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाना है। परिवहन विभाग की टीमें जहां वाहनों की तकनीकी और दस्तावेजी जांच करेंगी, वहीं संबंधित विभागों का सहयोग अभियान को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण रहेगा।

स्कूल संचालकों से अपील

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी हरिओम ने जिले के सभी स्कूल संचालकों और स्कूली वाहन स्वामियों से विशेष अपील की है कि वे अपने स्कूल में संचालित वाहनों की फिटनेस जल्द से जल्द कराएं।उन्होंने कहा कि जिन वाहनों के जरूरी प्रपत्र अधूरे हैं, उन्हें समय रहते पूरा करा लिया जाए। इससे अभियान के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है और बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के परिवहन के लिए ऐसे वाहनों का ही संचालन कराए जो निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और तकनीकी रूप से सुरक्षित हों।

सड़क सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर

स्कूली बच्चों का सुरक्षित आवागमन सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे बस, वैन और अन्य स्कूली वाहनों के माध्यम से स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में इन वाहनों की फिटनेस और तकनीकी स्थिति का ठीक होना बेहद जरूरी है।वाहन में छोटी सी तकनीकी खराबी भी सड़क पर गंभीर समस्या का कारण बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन की ओर से ‘मिशन सेव फ्यूचर 3.0’ कार्यक्रम जारी किया गया है।परिवहन विभाग का यह अभियान स्कूली वाहनों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

14 से 19 सितंबर तक विशेष निगरानी

बदायूं में 14 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान परिवहन विभाग की चार टीमें स्कूलों में पहुंचकर वाहनों की जांच करेंगी।अभियान के दौरान नियमों का पालन करने वाले स्कूल संचालकों को जहां आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा, वहीं मानकों की अनदेखी करने वाले वाहनों और संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।विभाग की ओर से साफ किया गया है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

बच्चों की सुरक्षा में सभी की जिम्मेदारी

स्कूली बच्चों की सुरक्षा केवल परिवहन विभाग या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्कूल प्रशासन, वाहन स्वामी, चालक, अभिभावक और आम नागरिकों की भी भूमिका है।स्कूल संचालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को ले जाने वाले वाहन फिट और सुरक्षित हों। वाहन स्वामियों को समय पर फिटनेस और आवश्यक दस्तावेज पूरे कराने चाहिए। वहीं अभिभावकों को भी बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन की स्थिति को लेकर जागरूक रहना चाहिए।परिवहन विभाग ने सभी स्कूल संचालकों और वाहन स्वामियों से सड़क सुरक्षा अभियान में सहयोग करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि सामूहिक प्रयास से ही स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित यातायात व्यवस्था तैयार की जा सकती है।बदायूं में ‘सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान के जरिए अब स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट और तकनीकी स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। 14 से 19 सितंबर तक चलने वाला यह अभियान बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संचालित किया जाएगा।

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