सिद्धार्थनगर में स्कूल वाहनों पर DM सख्त, 15 साल पुराने वाहन बच्चों को ढोने से होंगे बाहर; अनफिट बसों पर कार्रवाई की चेतावनी

Editorial
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सिद्धार्थनगर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिद्धार्थनगर प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं। अम्बेडकर सभागार में जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता में हुई, जिसमें पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन समेत संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।बैठक में स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट, पंजीयन, सुरक्षा मानकों और बच्चों की निगरानी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अनफिट, असुरक्षित या अधूरे दस्तावेज वाले किसी भी वाहन का इस्तेमाल बच्चों के परिवहन के लिए नहीं किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालय प्रबंधन और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

15 साल पुराने वाहनों पर पूरी तरह रोक

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्देशों में से एक 15 वर्ष पुराने स्कूल वाहनों को लेकर रहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि 15 साल पुराने वाहनों का विद्यालय में बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।प्रशासन का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुराने वाहनों में तकनीकी खराबी और सुरक्षा संबंधी जोखिम की आशंका अधिक हो सकती है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।

फिटनेस और परमिट खत्म तो वाहन नहीं चलेगा

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिया कि जिन वाहनों की फिटनेस, परमिट या अन्य जरूरी दस्तावेज समाप्त हो चुके हैं, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बच्चों के आवागमन के लिए न चलाया जाए।विद्यालय प्रबंधन को यह भी बताना होगा कि जिन वाहनों के दस्तावेज समाप्त हो चुके हैं, उनके दस्तावेज कब तक वैध और पूर्ण कराए जाएंगे।डीएम ने स्पष्ट किया कि कागजात पूरे होने तक ऐसे वाहनों का संचालन नहीं किया जाना चाहिए।यानी अब सिर्फ स्कूल वाहन का होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी वैध होना जरूरी होगा।

कबाड़ हो चुके वाहनों का भी रिकॉर्ड दुरुस्त करें

बैठक में उन वाहनों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए जो अब स्कूल के संचालन में नहीं हैं या जिन्हें विद्यालय द्वारा कटवाकर समाप्त किया जा चुका है।जिलाधिकारी ने कहा कि यदि ऐसा कोई वाहन अभी भी आरटीओ कार्यालय के अभिलेखों में विद्यालय के नाम पर दर्ज है तो उसका पंजीयन नियमानुसार निरस्त कराया जाए।इसका मकसद स्कूल के रिकॉर्ड और आरटीओ के दस्तावेजों में पारदर्शिता बनाए रखना है।प्रशासन ने स्कूल प्रबंधकों को यह भी समझाया कि पुराने या समाप्त हो चुके वाहनों की जानकारी रिकॉर्ड से हटाना जरूरी है, ताकि भविष्य में उनके नाम पर किसी तरह की जिम्मेदारी या विवाद की स्थिति न बने।

वाहन बेच दिया तो ट्रांसफर कराना भी जरूरी

स्कूल वाहनों की बिक्री को लेकर भी बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि अगर विद्यालय ने अपना कोई वाहन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया है तो यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन विद्यालय के नाम से नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर हो चुका है या नहीं।यदि वाहन बेचने के बाद भी उसका पंजीयन विद्यालय के नाम पर ही बना रहता है तो भविष्य में वाहन से होने वाली किसी घटना या नियम उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन पर आ सकती है।इसलिए वाहन बेचने के बाद दस्तावेजों में स्वामित्व परिवर्तन कराना भी स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

हर स्कूल वाहन में अटेंडेंट अनिवार्य

बैठक में बच्चों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक स्कूल वाहन में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी के लिए अटेंडेंट की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।स्कूल बस या अन्य वाहन में बच्चों के साथ एक जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी से यात्रा के दौरान बच्चों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है।खासकर छोटे बच्चों के मामले में अटेंडेंट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे वाहन में बच्चों की संख्या, चढ़ने-उतरने और यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा पर नजर रखी जा सकती है।

अनफिट वाहन मिला तो होगी कड़ी कार्रवाई

जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबंधकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि फिटनेस समाप्त हो चुके वाहनों का संचालन किसी भी स्थिति में न किया जाए।उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान ऐसा कोई वाहन बच्चों को लेकर संचालित पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन की इस चेतावनी के बाद अब स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। विद्यालयों को अपने सभी वाहनों के दस्तावेजों और फिटनेस की स्थिति की समीक्षा करनी होगी।सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि विद्यालय प्रबंधन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को ले जाने वाला वाहन पूरी तरह सुरक्षित और नियमों के अनुरूप हो।

स्कूल प्रबंधन की होगी बड़ी जिम्मेदारी

बैठक में जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रबंधकों से कहा कि स्कूल वाहनों से जुड़े सभी वैधानिक और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने की जिम्मेदारी केवल चालक की नहीं होती। विद्यालय प्रबंधन को भी यह देखना होगा कि वाहन सुरक्षित है या नहीं, उसके कागजात वैध हैं या नहीं और सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं या नहीं।ऐसे में प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने का संदेश दिया है।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक

जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता रही, जबकि पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन भी मौजूद रहे।इसके अलावा एआरटीओ संजय कुमार सिंह और अन्य संबंधित अधिकारी तथा विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक भी बैठक में उपस्थित रहे।अधिकारियों की मौजूदगी में स्कूल वाहनों से जुड़े सुरक्षा मानकों को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।

बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं

बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।15 साल पुराने वाहन, अनफिट वाहन, समाप्त परमिट वाले वाहन और अधूरे दस्तावेज वाले वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर नहीं चल सकेंगे। वहीं हर स्कूल वाहन में अटेंडेंट की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करनी होगी।अब देखना होगा कि इन निर्देशों का स्कूल प्रबंधन कितनी गंभीरता से पालन करता है और प्रशासन की ओर से होने वाली जांच में कितने वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं।सिद्धार्थनगर प्रशासन का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बस या वैन में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी। नियमों का पालन स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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