देहरादून उत्तराखंड में मदरसों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें नए प्रशासनिक ढांचे के तहत लाने की सरकार की कोशिश को शुरुआती चरण में बड़ा झटका लगा है। राज्य में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से मदरसों को मान्यता लेने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक केवल सात मदरसों को ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता मिल सकी है।राज्य में मदरसा बोर्ड से जुड़े रहे कुल 452 मदरसों में से अधिकांश अभी मान्यता की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। वहीं, देहरादून जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से प्राधिकरण को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ मदरसों ने मान्यता लेने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कुछ संस्थानों ने जांच टीम को आवश्यक जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई।
- एक जुलाई से बदली व्यवस्था, अब प्राधिकरण के तहत मान्यता
- 452 मदरसों में सिर्फ सात को मिली मान्यता
- पहले से मान्यता प्राप्त 41 मदरसों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं
- ऊधमसिंह नगर में 11 आवेदन, सभी खारिज
- 30 सितंबर तक का समय, फिर कार्रवाई की तैयारी
- सरकार का फोकस बच्चों की आधुनिक शिक्षा पर
- मान्यता न लेने वाले मदरसों पर बढ़ेगी नजर
एक जुलाई से बदली व्यवस्था, अब प्राधिकरण के तहत मान्यता
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के बाद एक जुलाई 2026 से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप मान्यता लेने की प्रक्रिया से गुजरना है।सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक व्यवस्था बदलना नहीं है, बल्कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी बताया जा रहा है। इसमें विज्ञान, गणित और अन्य आधुनिक विषयों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर है।सरकार की योजना अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और उन्हें एक समान प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में लाने की है। इस व्यवस्था में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं।

452 मदरसों में सिर्फ सात को मिली मान्यता
जांच रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 452 मदरसों में अभी तक केवल सात को मान्यता मिल पाई है। संख्या के लिहाज से यह कुल मदरसों का करीब डेढ़ फीसदी है। बाकी संस्थानों में से कई मान्यता के लिए जरूरी दस्तावेज और मानक पूरे करने की प्रक्रिया में हैं।रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ मदरसों ने जांच टीम के साथ अपेक्षित जानकारी साझा नहीं की। कुछ संस्थानों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेना चाहते।इस स्थिति ने सरकार और प्राधिकरण के सामने चुनौती बढ़ा दी है, क्योंकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी संबंधित संस्थानों को मान्यता प्रक्रिया पूरी करनी है।
पहले से मान्यता प्राप्त 41 मदरसों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं
मदरसा बोर्ड से पहले मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में भी अधिकतर ने अभी तक नए मानकों को पूरा नहीं किया है। इनमें से कुछ संस्थानों की ओर से बताया गया है कि वे मान्यता के लिए जरूरी पत्रावली तैयार कर रहे हैं।यानी पुराने ढांचे में मान्यता प्राप्त मदरसों को भी नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके लिए उन्हें शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।
ऊधमसिंह नगर में 11 आवेदन, सभी खारिज
मान्यता प्रक्रिया के दौरान जिलों में स्थिति अलग-अलग सामने आई है। ऊधमसिंह नगर में 11 मदरसों ने शिक्षा विभाग के समक्ष मान्यता के लिए आवेदन किया था। हालांकि निर्धारित मानक पूरे नहीं होने के कारण सभी 11 आवेदन खारिज कर दिए गए।वहीं हरिद्वार में 18 मदरसों में से सात को मान्यता मिल चुकी है। इससे साफ है कि जिलों में मान्यता प्रक्रिया की स्थिति एक जैसी नहीं है।दूसरी ओर देहरादून और नैनीताल में अभी तक मान्यता को लेकर बैठक नहीं हुई है। ऐसे में इन जिलों के मदरसों की स्थिति भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
30 सितंबर तक का समय, फिर कार्रवाई की तैयारी
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों और मदरसों को मान्यता लेने के लिए सरकार की ओर से तीन महीने का समय दिया गया है। यह समय सीमा 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगी।प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद मान्यता न लेने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।उन्होंने कहा कि संबंधित संस्थानों के सामने अब दो विकल्प हैं—या तो निर्धारित मानकों को पूरा कर मान्यता लें या फिर वहां पढ़ने वाले बच्चों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित करें।
क्या बोले अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष?
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा, “मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। 30 सितंबर को तीन महीने पूरे हो जाएंगे। इसके बाद इस तरह के मदरसों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। ऐसे में इनके पास दो विकल्प रहेंगे या तो मान्यता लें या फिर मदरसों से बच्चों को शिफ्ट करें।”
सरकार का फोकस बच्चों की आधुनिक शिक्षा पर
सरकार की ओर से मदरसों की मान्यता प्रक्रिया को शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे आगे की पढ़ाई और रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।इसके लिए संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक और प्रशासनिक मानकों को पूरा करना होगा। मान्यता प्रक्रिया पूरी होने के बाद संस्थानों की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाने की कोशिश की जा रही है।
मान्यता न लेने वाले मदरसों पर बढ़ेगी नजर
जांच रिपोर्ट में कुछ संस्थानों द्वारा मान्यता लेने से इनकार करने की बात सामने आने के बाद अब ऐसे मदरसों पर प्राधिकरण की नजर रहेगी। इसके अलावा जिन संस्थानों ने जांच टीम को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनसे भी जवाब मांगे जाने की संभावना है।30 सितंबर की समय सीमा इस पूरी प्रक्रिया के लिए अहम मानी जा रही है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने मदरसे नए नियमों के तहत मान्यता हासिल करते हैं और कितने संस्थान सरकारी व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प चुनते हैं।
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