नई दिल्ली दिल्ली के बवाना इलाके के एक निजी स्कूल में नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाली करीब तीन साल की बच्ची के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में स्कूल में कैब ड्राइवर के तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। बच्ची के व्यवहार में बदलाव के बाद परिवार को घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद स्कूल प्रशासन और पुलिस को इसकी सूचना दी गई।पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप है। बच्ची आरोपी का नाम नहीं बता सकी थी। उसने अपनी मां को स्कूल में आने वाले एक व्यक्ति के बारे में बताया, जिसके बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया।मामले की जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल में लगे सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों की मदद से आरोपी की पहचान की। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

बच्ची के व्यवहार में बदलाव से सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, बच्ची के व्यवहार में बदलाव देखकर उसकी मां ने उससे बातचीत की। पूछताछ के दौरान बच्ची ने स्कूल से जुड़े एक व्यक्ति के बारे में जानकारी दी। चूंकि बच्ची आरोपी का नाम नहीं बता पा रही थी, इसलिए परिवार ने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया।इसके बाद स्कूल प्रशासन की ओर से बच्ची को कर्मचारियों और स्कूल से जुड़े लोगों की तस्वीरें तथा सीसीटीवी फुटेज दिखाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त को बच्ची ने फुटेज और तस्वीरों में आरोपी कैब ड्राइवर को पहचान लिया।बच्ची की पहचान और परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को मिले अहम सुराग
पुलिस की शुरुआती जांच में सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। फुटेज की जांच के दौरान आरोपी की गतिविधियों को लेकर पुलिस को कुछ अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है।पुलिस के अनुसार, आरोपी स्कूल परिसर में चॉकलेट लेकर घूमता दिखाई दिया। आरोप है कि उसने बच्ची को बहलाकर स्कूल के एक हिस्से में ले जाकर उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

आरोपी पिछले आठ महीने से स्कूल में कर रहा था काम
जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपी पिछले करीब आठ महीने से स्कूल में कैब ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की स्कूल परिसर में क्या जिम्मेदारियां थीं और उसे बच्चों तक किस तरह की पहुंच हासिल थी।जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या आरोपी के खिलाफ पहले भी किसी तरह की शिकायत सामने आई थी या नहीं।पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, मोबाइल की जांच की जा रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य संभावित साक्ष्य सामने आ सकें।
दूसरे बच्चों को लेकर भी जांच
पुलिस को आरोपी के फोन में कुछ ऐसे वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है, जिनमें वह बच्चों के साथ दिखाई देता है। अब जांच अधिकारी इन वीडियो की सत्यता और संदर्भ की जांच कर रहे हैं।पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो में दिखाई देने वाले बच्चे कौन हैं और क्या उनका इस मामले से कोई संबंध है। जरूरत पड़ने पर संबंधित बच्चों को विशेषज्ञों की मदद से काउंसलिंग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।हालांकि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी अन्य बच्चे के साथ गलत व्यवहार की पुष्टि नहीं की जा सकती।
स्कूल परिसर को लेकर भी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल परिसर के संबंध में भी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी है। अधिकारियों की ओर से स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की निगरानी से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की जा रही है।इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के बीच बच्चों की सुरक्षा, कर्मचारियों के सत्यापन और परिसर में निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
नर्सरी जैसे छोटे बच्चों के मामले में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल परिसर में पर्याप्त निगरानी, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, सुरक्षित परिवेश और शिकायत की स्थिति में तत्काल कार्रवाई जरूरी मानी जाती है।विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों से जुड़े मामलों में अभिभावकों को उनके व्यवहार में अचानक होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, किसी भी स्थिति में बच्चे पर दबाव डालने के बजाय संवेदनशील तरीके से बातचीत करना जरूरी है।
पॉक्सो एक्ट के तहत जांच जारी
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आगे की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों को शामिल किया जा रहा है।फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से जुड़े सभी तथ्य क्या हैं और क्या आरोपी की भूमिका किसी अन्य मामले में भी सामने आती है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा में परिवार, स्कूल प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की सतर्कता बेहद जरूरी है। बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में उनकी पहचान और निजता की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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