लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में कथित धर्मांतरण गिरोह से जुड़े मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने वर्षों तक बेहद सुनियोजित तरीके से काम किया और लोगों का विश्वास जीतने के लिए धार्मिक प्रतीकों, स्थानीय परंपराओं और सामाजिक सहायता का सहारा लिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरोह के सदस्य प्रार्थना स्थल को “प्रभु ईसामसीह मंदिर” के रूप में प्रस्तुत करते थे और वहां आने वाले लोगों से “ॐ श्रीयीशुख्रीष्टाय नमः” का जाप भी कराया जाता था, ताकि किसी को उनकी गतिविधियों पर संदेह न हो।पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में इस नेटवर्क की गतिविधियां कई वर्षों पुरानी प्रतीत हो रही हैं। मामले में वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और बाहरी संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है।
- तमिलनाडु से लखनऊ आने के बाद शुरू हुआ नेटवर्क, पुलिस की जांच में दावा
- ‘ॐ श्रीयीशुख्रीष्टाय नमः’ के जाप से भरोसा जीतने का आरोप
- चमत्कार और आर्थिक मदद का दिया जाता था लालच: पुलिस
- स्थानीय लोगों के विरोध के बाद हटाया गया बोर्ड
- बैंक खातों और संपत्तियों की हो रही जांच
- जांच के दायरे में नेटवर्क के अन्य सदस्य
- हर पहलू की हो रही कानूनी जांच
तमिलनाडु से लखनऊ आने के बाद शुरू हुआ नेटवर्क, पुलिस की जांच में दावा
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह का कथित सरगना डेनियल करीब 28 वर्ष पहले तमिलनाडु से लखनऊ आया था। आरोप है कि उसने धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के बीच संपर्क बनाए और बाद में अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच बनाता था।जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2021 में मोहनलालगंज क्षेत्र के शिवलर गांव में एक मकान में नियमित प्रार्थना सभाएं शुरू की गईं। आरोप है कि इस स्थान को चर्च के बजाय “प्रभु ईसामसीह मंदिर” के रूप में प्रचारित किया जाता था और गांव में इसी नाम का दिशासूचक बोर्ड भी लगाया गया था।
‘ॐ श्रीयीशुख्रीष्टाय नमः’ के जाप से भरोसा जीतने का आरोप
पुलिस के अनुसार, प्रार्थना सभा में आने वाले लोगों से “ॐ श्रीयीशुख्रीष्टाय नमः” का जाप कराया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि स्थानीय लोगों को यह धार्मिक आयोजन किसी मंदिर या सामान्य आध्यात्मिक सभा जैसा लगे और गतिविधियों पर संदेह न हो।आरोप है कि शुरुआत में लोगों को केवल प्रार्थना, आध्यात्मिक चर्चा और धार्मिक पुस्तकों के माध्यम से जोड़ा जाता था। धीरे-धीरे उन्हें ईसाई धर्म से जुड़ी शिक्षाएं सुनाई जाती थीं और नियमित रूप से सभाओं में आने के लिए प्रेरित किया जाता था।

चमत्कार और आर्थिक मदद का दिया जाता था लालच: पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को मिले इनपुट के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता था कि नियमित प्रार्थना करने से उनके जीवन की समस्याएं दूर हो जाएंगी और “चमत्कार” होंगे।पुलिस का आरोप है कि पढ़े-लिखे लोगों को धार्मिक साहित्य देकर घर पर प्रार्थना करने के लिए कहा जाता था, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद कर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या कथित आर्थिक सहायता का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए प्रलोभन के रूप में किया गया।
स्थानीय लोगों के विरोध के बाद हटाया गया बोर्ड
मामले में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, जब गांव के कुछ लोगों को इन गतिविधियों पर संदेह हुआ तो उन्होंने प्रशासन और पुलिस से शिकायत की।शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कथित तौर पर लगाया गया दिशासूचक बोर्ड हटवा दिया। इसके बाद पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई और संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू हुई।

बैंक खातों और संपत्तियों की हो रही जांच
मामले की जांच अब केवल कथित धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। पुलिस गिरोह के वित्तीय स्रोतों की भी जांच कर रही है।दक्षिणी लखनऊ के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कथित सरगना डेनियल के बैंक खातों की जांच में बाहर से धनराशि आने के संकेत मिले हैं। हालांकि, यह धन किस उद्देश्य से भेजा गया और उसका उपयोग किन गतिविधियों में हुआ, इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जारी है।पुलिस डेनियल और उसकी पत्नी की संपत्तियों, बैंक लेनदेन, आय के स्रोत और संभावित सहयोगियों की भी जानकारी जुटा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है।
जांच के दायरे में नेटवर्क के अन्य सदस्य
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और क्या अन्य जिलों या राज्यों से भी इसका कोई संबंध था।जांच एजेंसियां उन लोगों से भी पूछताछ कर रही हैं, जो कथित रूप से प्रार्थना सभाओं में शामिल होते थे या जिनका इस नेटवर्क से किसी प्रकार का संपर्क रहा है।
हर पहलू की हो रही कानूनी जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाणों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।जांच पूरी होने के बाद यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत चार्जशीट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।मोहनलालगंज में सामने आया यह कथित धर्मांतरण गिरोह का मामला उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस के अनुसार, गिरोह पर धार्मिक पहचान छिपाकर लोगों का विश्वास जीतने, प्रार्थना सभाओं के माध्यम से संपर्क बढ़ाने और आर्थिक सहायता व चमत्कार जैसे दावों के जरिए लोगों को प्रभावित करने के आरोप हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की गहन जांच में जुटी हुई है।
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