
- सुबह 5:30 बजे मची अफरा-तफरी, शेल्टर होम में फंसे थे लोग
- रात से मिल रहे थे खतरे के संकेत, फिर भी नहीं जागा बिजली विभाग
- पुलिस मिनटों में पहुंची, दमकल को लग गया एक घंटा
- कर्मचारियों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
- अलीगंज अग्निकांड के बाद भी नहीं बदले हालात
- जांच के आदेश, शॉर्ट सर्किट की आशंका
- बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
- अब जिम्मेदारी तय करने की मांग
लखनऊ राजधानी के लोकबंधु अस्पताल में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। उस समय सेंटर के शेल्टर होम में एक महिला, दो किशोरियां और चार कर्मचारी मौजूद थे। गनीमत रही कि कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया और खुद आग बुझाने में जुट गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आग की सूचना मिलने के बावजूद दमकल विभाग की गाड़ी करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची, जबकि तब तक अस्पताल के कर्मचारियों और स्टाफ ने आग पर काफी हद तक काबू पा लिया था।घटना ने एक बार फिर राजधानी में फायर सेफ्टी, आपातकालीन सेवाओं और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुबह 5:30 बजे मची अफरा-तफरी, शेल्टर होम में फंसे थे लोग
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे वन स्टॉप सेंटर के एक हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग ने अंदर रखे सामान को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। आग लगते ही सेंटर में मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत अलर्ट होकर वहां रह रही महिला और दोनों लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला।कर्मचारियों ने अस्पताल में उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों और अन्य संसाधनों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। उनकी तत्परता के कारण आग पूरे भवन में फैलने से पहले ही नियंत्रित कर ली गई। यदि कुछ मिनट और देरी होती तो यह आग शेल्टर होम तक पहुंच सकती थी और बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।
रात से मिल रहे थे खतरे के संकेत, फिर भी नहीं जागा बिजली विभाग
वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी अर्चना सिंह ने बताया कि गुरुवार शाम से ही बिजली बार-बार ट्रिप हो रही थी। बार-बार बिजली गुल होने और वायरिंग में समस्या की जानकारी संबंधित बिजली विभाग को दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जांच नहीं की।प्रभारी का आरोप है कि शुक्रवार सुबह आग लगने के बाद भी संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और बिजली विभाग के अन्य कर्मचारियों को कई बार फोन किया गया ताकि तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कराई जा सके, लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। इससे आग और बढ़ने का खतरा बना रहा।
पुलिस मिनटों में पहुंची, दमकल को लग गया एक घंटा
घटना की सूचना मिलते ही कृष्णा नगर पुलिस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई और स्थिति को संभालने में कर्मचारियों की मदद की। दूसरी ओर, फायर ब्रिगेड की गाड़ी को घटनास्थल तक पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग गया।सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना सुबह के समय हुई, जब सड़कों पर ट्रैफिक भी नहीं था। इसके बावजूद दमकल की इतनी देरी ने आपातकालीन सेवाओं की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तक फायर ब्रिगेड पहुंची, तब तक आग लगभग बुझ चुकी थी।
कर्मचारियों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
इस घटना में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई। कर्मचारियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि स्टाफ तुरंत कार्रवाई नहीं करता तो आग पूरे सेंटर को अपनी चपेट में ले सकती थी।वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को अस्थायी आश्रय दिया जाता है। ऐसे संवेदनशील संस्थान में आग लगना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अलीगंज अग्निकांड के बाद भी नहीं बदले हालात
हाल ही में राजधानी में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने, बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय कम करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन लोकबंधु अस्पताल की यह घटना उन दावों की हकीकत सामने लाती दिखाई दे रही है।एक तरफ बिजली विभाग शिकायत के बावजूद सक्रिय नहीं हुआ, दूसरी ओर दमकल विभाग की देरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि यदि आग विकराल रूप ले लेती तो क्या स्थिति होती।
जांच के आदेश, शॉर्ट सर्किट की आशंका
प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रशासन ने घटना की रिपोर्ट तलब कर ली है और बिजली व्यवस्था के साथ-साथ फायर सेफ्टी सिस्टम की भी जांच कराई जाएगी।अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
- जब गुरुवार शाम से बिजली ट्रिप होने की शिकायत थी, तो उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?
- आग लगने के बाद बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन क्यों नहीं उठाया?
- दमकल विभाग को मौके पर पहुंचने में लगभग एक घंटा क्यों लग गया?
- संवेदनशील संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट और आपातकालीन तैयारियों की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हो रही?
अब जिम्मेदारी तय करने की मांग
लोकबंधु अस्पताल के वन स्टॉप सेंटर में लगी आग भले ही समय रहते बुझा ली गई, लेकिन इस घटना ने राजधानी की आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों की पोल खोल दी है। यदि कर्मचारियों ने साहस और सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो यह घटना बड़े हादसे में बदल सकती थी।अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर है। सवाल सिर्फ आग लगने का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है, जो पहले शिकायतों को नजरअंदाज करता है और हादसे के बाद हरकत में आता है। यदि इस घटना से भी सबक नहीं लिया गया तो भविष्य में ऐसी लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
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