ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज रात करोड़ों भारतीयों की निगाहें एक ही खिलाड़ी पर टिकी होंगी— ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा। भारतीय एथलेटिक्स का यह गोल्डन बॉय एक बार फिर इतिहास रचने के इरादे से जेवलिन थ्रो फाइनल में उतरने जा रहा है। आठ साल पहले गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाने वाले नीरज के सामने अब फिर वही सुनहरा मौका है।भारतीय समयानुसार 1 अगस्त की देर रात 12:45 बजे शुरू होने वाले इस मुकाबले में सिर्फ एक गोल्ड मेडल दांव पर नहीं होगा, बल्कि नीरज की वापसी, उनका आत्मविश्वास और दुनिया को फिर यह संदेश देने का अवसर होगा कि भारत का सबसे बड़ा भालाफेंक खिलाड़ी अभी भी शीर्ष पर कायम है।
आठ साल बाद फिर गोल्ड पर नजर
कॉमनवेल्थ गेम्स का नाम आते ही भारतीय खेल प्रेमियों के मन में सबसे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट का वह ऐतिहासिक पल याद आता है, जब नीरज चोपड़ा ने 86.47 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुष भालाफेंक स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।उस जीत के बाद नीरज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एशियाई खेलों में गोल्ड, टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक स्वर्ण, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप का खिताब और पेरिस ओलंपिक का रजत पदक जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।अब आठ वर्षों बाद वह फिर कॉमनवेल्थ के मंच पर लौटे हैं और पूरे देश को उनसे एक और गोल्ड की उम्मीद है।

चोटों से लड़कर लौटे हैं गोल्डन बॉय
पिछला एक वर्ष नीरज के लिए आसान नहीं रहा। लगातार पीठ की चोट ने उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया। कई प्रतियोगिताओं में वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से दूर नजर आए। विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 उनके करियर की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में गिनी गई।लेकिन एक चैंपियन की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि वह मुश्किलों से टूटता नहीं, बल्कि और मजबूत होकर लौटता है।नीरज ने अपने रन-अप, तकनीक और थ्रो के एंगल पर दोबारा मेहनत की। उन्होंने अभ्यास का तरीका बदला और शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय संतुलित तैयारी पर जोर दिया। अब वह चोट के डर से नहीं, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

क्वालिफिकेशन में सुरक्षित जगह बनाई
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज ने 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए फाइनल में जगह बनाई। वह कुल मिलाकर पांचवें स्थान पर रहे, लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ फाइनल में पहुंचना था।भारतीय टीम के लिए खुशी की बात यह रही कि नीरज के अलावा रोहित यादव और यश वीर सिंह ने भी फाइनल में जगह बनाई है। यानी भारत के तीन खिलाड़ी पदक की दौड़ में शामिल हैं।

गोल्ड की राह आसान नहीं
नीरज के सामने इस बार चुनौती पहले से कहीं ज्यादा कठिन होगी।सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम से मिलेगी, जिनके साथ नीरज की प्रतिद्वंद्विता अब विश्व एथलेटिक्स की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में शामिल हो चुकी है।इसके अलावा ग्रेनाडा के पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट, श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के अनुभवी खिलाड़ी केशोर्न वॉलकॉट भी पदक की दौड़ में मजबूत दावेदार हैं।ऐसे में फाइनल बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।
भारत की उम्मीदों का सबसे बड़ा चेहरा
पिछले कुछ वर्षों में नीरज सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की प्रेरणा बन चुके हैं।उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स को वह सम्मान दिलाया, जिसकी कभी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी।जब भी नीरज मैदान में उतरते हैं, पूरा देश टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाता है। हर थ्रो के साथ करोड़ों दिल धड़कते हैं और हर सफल प्रयास पर पूरा भारत जश्न मनाता है।इस बार भी देश को उसी सुनहरे पल का इंतजार है।

क्या फिर बनेगा इतिहास?
यदि नीरज इस बार स्वर्ण जीतने में सफल रहते हैं तो वह कॉमनवेल्थ गेम्स में दूसरी बार गोल्ड जीतने वाले चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में और मजबूती से अपनी जगह बना लेंगे।यह जीत केवल एक पदक नहीं होगी, बल्कि यह साबित करेगी कि चोट और मुश्किलें किसी महान खिलाड़ी के हौसले को नहीं रोक सकतीं।
कब और कितने बजे होगा मुकाबला?
पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल भारतीय समयानुसार 1 अगस्त (शनिवार) की देर रात 12:45 बजे शुरू होगा।हालांकि स्कॉटलैंड के स्थानीय समय के अनुसार यह मुकाबला 31 जुलाई को खेला जाएगा।
कहां देखें लाइव मुकाबला?
अगर आप नीरज चोपड़ा का गोल्ड मेडल मुकाबला लाइव देखना चाहते हैं तो इसकी लाइव स्ट्रीमिंग Sony LIV ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।टीवी पर इसका सीधा प्रसारण Sony Sports Ten 2, Sony Sports Ten 3 (हिंदी) तथा Sony Sports Ten 4 पर किया जाएगा।
हर भारतीय की निगाह नीरज पर
आज रात सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरे भारत की उम्मीद मैदान में उतरने वाली है। नीरज चोपड़ा के भाले के साथ करोड़ों भारतीयों के सपने भी उड़ान भरेंगे।अगर उनका भाला एक बार फिर 85-90 मीटर के पार पहुंचता है, तो ग्लास्गो का मैदान भारत के तिरंगे और राष्ट्रगान की गूंज से भर सकता है।अब सबकी निगाहें घड़ी की सुइयों पर हैं। आधी रात के बाद जब फाइनल शुरू होगा, तब यह तय होगा कि क्या भारत का ‘गोल्डन बॉय’ एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचकर देश को स्वर्णिम खुशी देगा, या फिर मुकाबला किसी नए चैंपियन के नाम होगा। फिलहाल पूरा देश यही दुआ कर रहा है— “चलो नीरज, एक और गोल्ड लेकर आओ!”
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