धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’, 364 दिन तानों पर कही बात

Editorial
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शिवपुरी करवा चौथ के मौके पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान चर्चा में है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने करवा चौथ को मजाकिया अंदाज में ‘खसम पूजन दिवस’ कह दिया। इसके बाद उन्होंने पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर ऐसी बात कही, जिसने कथा के दौरान मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। उनका कहना था कि पत्नियां पति की लंबी उम्र के लिए साल में एक दिन पूरे नियम और श्रद्धा से व्रत रखती हैं, लेकिन बाकी 364 दिन उन्हें ताने नहीं देने चाहिए।धीरेंद्र शास्त्री की यह टिप्पणी 28 अक्टूबर को कई मीडिया रिपोर्टों में सामने आई। कथा के दौरान आयोजित ‘सीधी बात’ सत्र में एक श्रद्धालु ने करवा चौथ के व्रत को लेकर सवाल पूछा था। जवाब देते हुए शास्त्री ने अपने चुटीले अंदाज में त्योहार का नया नाम बताया और फिर वैवाहिक जीवन में प्रेम, सम्मान और समझदारी बनाए रखने की बात कही।

करवा चौथ को क्यों कहा ‘खसम पूजन दिवस’?

करैरा में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान एक श्रद्धालु ने अपनी नई शादी का जिक्र करते हुए करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर सवाल किया। इसी बातचीत के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने हंसी-मजाक में करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ कह दिया।इसके बाद उन्होंने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने और साल के बाकी दिनों में पति-पत्नी के बीच होने वाली नोकझोंक को जोड़ते हुए टिप्पणी की। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि एक दिन पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने के बाद बाकी 364 दिन उसे ताने नहीं देने चाहिए।उनकी बात का संदर्भ वैवाहिक जीवन में होने वाली आम कहासुनी से जुड़ा था। उन्होंने ऐसे तानों का उदाहरण भी दिया, जिनमें शादी के फैसले या शादी के मुहूर्त को लेकर शिकायत की जाती है। उनके इस अंदाज पर कथा में मौजूद लोगों के हंसने का भी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख है।

धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’,
धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’,

सिर्फ एक दिन की पूजा नहीं, पूरे साल बना रहे प्यार और सम्मान

धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी का दूसरा पहलू पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर दिया गया उनका संदेश था। उन्होंने करवा चौथ के व्रत को केवल एक दिन की धार्मिक रस्म तक सीमित न रखने की बात कही। उनका जोर इस विचार पर था कि जिस श्रद्धा और समर्पण के साथ इस दिन पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है, वैसा ही प्रेम और सम्मान रोजमर्रा के जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, दिनभर व्रत रखने के बाद चंद्र दर्शन और पूजा करके व्रत खोला जाता है। इस त्योहार का धार्मिक और भावनात्मक महत्व अनेक परिवारों में गहरा है।शास्त्री की बात इसी परंपरा को वैवाहिक जीवन के व्यवहार से जोड़ती है। उनका संदेश था कि रिश्ते में प्यार और समर्पण केवल किसी खास दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे के प्रति सम्मान, संवाद और सहयोग पूरे साल बना रहना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’,
धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’,

पश्चिमी संस्कृति का जिक्र कर भारतीय परंपराओं की बात

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने जवाब में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव का भी जिक्र किया और भारतीय परंपराओं को बनाए रखने की बात कही। उन्होंने करवा चौथ के अवसर पर व्रत रखने के साथ एक संकल्प लेने का सुझाव दिया—रिश्ते में जिस प्रेम और समर्पण की भावना को इस दिन व्यक्त किया जाता है, उसे पूरे वर्ष कायम रखा जाए।करवा चौथ की पूजा-विधि और उससे जुड़ी रस्में अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में अलग हो सकती हैं। कई परिवारों में महिलाएं सरगी ग्रहण करती हैं, शाम को पूजा और कथा करती हैं तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। इन परंपराओं के साथ त्योहार का भावनात्मक पक्ष भी जुड़ा हुआ है।शास्त्री की टिप्पणी में धार्मिक आस्था के साथ वैवाहिक जीवन की रोजमर्रा की चुनौतियों का जिक्र भी था। हालांकि, उनका बयान मजाकिया संदर्भ में था, इसलिए इसे सभी महिलाओं या सभी वैवाहिक रिश्तों के बारे में सामान्य निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हर रिश्ते की परिस्थितियां अलग होती हैं और उसमें सम्मान तथा संवाद दोनों पक्षों की जिम्मेदारी होते हैं।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आया बयान

करवा चौथ से ठीक पहले दिया गया यह बयान मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। ‘खसम पूजन दिवस’ और ‘एक दिन व्रत, 364 दिन ताने’ जैसे शब्दों ने बयान को खास पहचान दी। रिपोर्टों में इसे धीरेंद्र शास्त्री के चुटीले अंदाज में कही गई बात के रूप में पेश किया गया है। बयान के वायरल होने या चर्चा में आने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों की इस पर एक जैसी राय है। कुछ लोग इसे वैवाहिक रिश्तों पर हल्के-फुल्के व्यंग्य और सालभर प्रेम बनाए रखने के संदेश के रूप में देख सकते हैं, जबकि कुछ लोग ऐसे सामान्यीकृत मजाक से असहमत भी हो सकते हैं।

करवा चौथ का संदेश क्या होना चाहिए?

करवा चौथ भारतीय परंपरा में आस्था, परिवार और वैवाहिक जीवन से जुड़ा त्योहार है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपने पति के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं, किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए केवल एक दिन की रस्म पर्याप्त नहीं होती। नियमित बातचीत, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना, जिम्मेदारियां साझा करना और सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने मजाकिया बयान के जरिए इसी बात पर जोर दिया कि करवा चौथ पर व्यक्त होने वाली प्रेम और समर्पण की भावना सालभर बनी रहनी चाहिए। उनके बयान की चर्चा के बीच इसका व्यापक संदेश यही है कि पति-पत्नी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए।

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