लखनऊ मैक्स अस्पताल: ट्रॉमा में गोल्डन आवर अहम, चेहरे की जटिल सर्जरी की जानकारी

Editorial
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लखनऊ सड़क दुर्घटना में गंभीर चोट लगने के बाद शुरुआती समय मरीज की जिंदगी बचाने और स्थायी दिव्यांगता का खतरा कम करने में निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना, तेजी से जांच होना और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का तुरंत इलाज शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी संदेश के साथ मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ ने विश्व ट्रॉमा दिवस के बाद जागरूकता सत्र आयोजित किया। इसमें डॉक्टरों ने ट्रॉमा केयर में ‘गोल्डन आवर’ की अहमियत बताई और चेहरे की गंभीर चोटों के दो जटिल मामलों की जानकारी साझा की।अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर दुर्घटनाओं में केवल चोट का इलाज करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मरीज की स्थिति का तेजी से आकलन, अंदरूनी चोटों की पहचान और जरूरत के अनुसार विभिन्न विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी होता है। सिर, मस्तिष्क, रीढ़, हड्डियों और चेहरे पर गंभीर चोट लगने की स्थिति में इलाज में देरी मरीज की हालत को जटिल बना सकती है।

लखनऊ मैक्स अस्पताल: ट्रॉमा में गोल्डन आवर अहम
लखनऊ मैक्स अस्पताल: ट्रॉमा में गोल्डन आवर अहम

क्या है गोल्डन आवर, ट्रॉमा में क्यों है अहम?

दुर्घटना के बाद का शुरुआती महत्वपूर्ण समय आमतौर पर ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है। ट्रॉमा केयर में इस अवधारणा का उद्देश्य यह समझाना है कि गंभीर रूप से घायल मरीज को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज के लिए ठीक 60 मिनट की कोई निश्चित समय-सीमा होती है। चोट की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार तत्काल उपचार की जरूरत अलग-अलग हो सकती है।मैक्स अस्पताल में आयोजित जागरूकता सत्र के दौरान न्यूरोसर्जरी, इमरजेंसी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स और डेंटल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने इस विषय पर जानकारी दी। डॉक्टरों ने एंबुलेंस की समय पर उपलब्धता, दुर्घटना के बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने और इमरजेंसी में तुरंत उपचार शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया।सत्र में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर चोटों के मामलों में अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समय पर जांच और सही उपचार से कई जटिलताओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

साइकिल दुर्घटना में 12 वर्षीय बच्चे के जबड़े की तीन जगह टूटी हड्डियां

अस्पताल ने चेहरे की गंभीर चोटों से जुड़े दो मामलों का विवरण साझा किया। इनमें पहला मामला 12 वर्षीय सार्थक पांडेय का है, जिन्हें साइकिल दुर्घटना में चेहरे पर गंभीर चोट लगी थी। हादसे में उनके निचले जबड़े की हड्डी तीन अलग-अलग जगहों से टूट गई थी। इससे चेहरे की बनावट भी प्रभावित हुई थी।सार्थक को इलाज के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ लाया गया। यहां डेंटल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी ने सर्जरी के जरिए जबड़े की टूटी हड्डियों को दोबारा सही स्थिति में लाकर स्थिर किया।अस्पताल के अनुसार, उपचार और रिकवरी के बाद बच्चे के चेहरे की बनावट को बेहतर करने में मदद मिली और वह सामान्य जीवन में लौट आया। बच्चों में चेहरे की हड्डियों की चोट का उपचार विशेष सावधानी मांगता है, क्योंकि इस उम्र में हड्डियों का विकास जारी रहता है। ऐसे मामलों में सर्जरी की योजना बनाते समय वर्तमान चोट के साथ भविष्य में चेहरे की संरचना और जबड़े की कार्यक्षमता का भी ध्यान रखना पड़ता है।

चेहरे की कई हड्डियां टूटीं, मिनी टाइटेनियम प्लेटों से किया उपचार

दूसरा मामला 35 वर्षीय सिद्धार्थ सिंह का है, जिन्हें दुर्घटना में चेहरे पर गंभीर चोट लगी थी। चोट के कारण उनके चेहरे की कई हड्डियां छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गई थीं। कई अस्पतालों में उपचार कराने के बाद वह मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ पहुंचे।अस्पताल के मुताबिक, डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी और उनकी टीम ने सर्जरी के दौरान चेहरे की टूटी हड्डियों को सावधानीपूर्वक उनकी सही स्थिति में जोड़ा। इसके बाद मिनी टाइटेनियम प्लेटों की मदद से हड्डियों को स्थिर किया गया। उपचार के दौरान क्षतिग्रस्त दांतों को भी बदला गया, ताकि दांतों के सही तरीके से मिलने और जबड़े की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।इस तरह की सर्जरी में चेहरे की बनावट को दोबारा व्यवस्थित करने के साथ-साथ चबाने, मुंह खोलने और जबड़े को हिलाने जैसी जरूरी गतिविधियों को सामान्य बनाने का प्रयास किया जाता है। अस्पताल के अनुसार, इस उपचार से मरीज के चेहरे की संरचना और कार्यक्षमता में सुधार लाने में मदद मिली।

चेहरे की सर्जरी में सिर्फ सुंदरता नहीं, कार्यक्षमता भी जरूरी

डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी ने बताया कि जब चेहरे की कई हड्डियां टूट जाती हैं, तो सर्जरी की योजना बनाना और उन्हें सही स्थिति में जोड़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि उपचार का उद्देश्य केवल चेहरे की बनावट सुधारना नहीं, बल्कि चबाने और जबड़े को हिलाने जैसी जरूरी क्रियाओं को बेहतर बनाना भी है।उन्होंने बच्चों के मामलों में विशेष सावधानी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इलाज के दौरान चेहरे की हड्डियों के विकास और भविष्य की कार्यक्षमता का ध्यान रखना पड़ता है। उनके अनुसार, समय पर इलाज और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के विशेषज्ञों का अनुभव ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।चेहरे पर गंभीर चोट लगने के बाद मरीज को दर्द, सूजन, दांतों के सही तरीके से न मिलने और जबड़े की गतिविधियों में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि कई हड्डियां टूट गई हों, तो उनकी स्थिति को ठीक करने के लिए विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है।

सिर की चोट में बाहर से सामान्य दिखने पर भी खतरा

सिर और मस्तिष्क की चोटों के बारे में बात करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ के सीनियर डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी डॉ. मनु रस्तोगी ने कहा कि सिर में चोट लगने के बाद उसकी गंभीरता का तुरंत पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता। सिर के अंदर रक्तस्राव, मस्तिष्क में सूजन या रीढ़ से जुड़ी चोट के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है।उन्होंने समय पर जांच और ऐसी चिकित्सा सुविधा में उपचार की जरूरत बताई, जहां गंभीर चोटों से निपटने के लिए जरूरी विशेषज्ञ और संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि उचित समय पर इलाज जटिलताओं को रोकने और मरीज के ठीक होने की संभावना बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।सिर में चोट लगने के बाद बेहोशी, बार-बार उल्टी, बढ़ता सिरदर्द, भ्रम, दौरे या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। गंभीर दुर्घटना के बाद लक्षणों का इंतजार करना उचित नहीं है।

विशेषज्ञों की टीम के साथ 24 घंटे ट्रॉमा केयर की सुविधा

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ के अनुसार, यहां 24 घंटे इमरजेंसी एंड ट्रॉमा सेंटर उपलब्ध है। अस्पताल में इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टरों के साथ न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक और मैक्सिलोफेशियल सर्जन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट मिलकर मरीजों का उपचार करते हैं।अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाओं, इंटेंसिव केयर यूनिट और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर की उपलब्धता की भी जानकारी दी गई। इसके अलावा, अस्पताल के अनुसार हार्ट एंड न्यूरो कमांड सेंटर के तहत न्यूरो ट्रॉमा के मरीजों के लिए विशेष इंटेंसिव केयर सुविधा भी उपलब्ध है।

दुर्घटना के बाद क्या करें?

सड़क दुर्घटना या गंभीर चोट की स्थिति में कुछ जरूरी कदम मरीज की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं:

  • तुरंत एंबुलेंस या स्थानीय आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।
  • गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से न हिलाएं, खासकर सिर, गर्दन या रीढ़ की चोट की आशंका होने पर।
  • तेज रक्तस्राव होने पर, यदि सुरक्षित हो, तो साफ कपड़े से घाव पर दबाव देकर मदद करें।
  • बेहोश व्यक्ति को खाने-पीने के लिए कुछ न दें।
  • मरीज को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में मदद करें।

मैक्स अस्पताल के जागरूकता सत्र का मुख्य संदेश यही रहा कि गंभीर दुर्घटना में समय पर चिकित्सा सहायता, सही जांच और विशेषज्ञों के बीच तालमेल मरीज की जान बचाने तथा लंबे समय तक रहने वाली दिव्यांगता के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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