रेलवे में ‘डिजिटल रिश्वत कनेक्शन’? CBI की जांच में बड़े अधिकारियों की बढ़ीं मुश्किलें

Editorial
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वाराणसीपूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) वाराणसी मंडल में कथित भ्रष्टाचार के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। सीनियर डिवीजनल मैटेरियल मैनेजर (डीएमएम) नितेश अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। अब जांच एजेंसी की नजर केवल गिरफ्तार अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कथित कमीशन नेटवर्क की परतें खोलने पर है। सूत्रों के अनुसार नितेश अग्रवाल के मोबाइल फोन और लैपटॉप से ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे कई अधिकारियों, ठेकेदारों और संदिग्ध संपर्कों की भूमिका सामने आने की संभावना जताई जा रही है।सीबीआई द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में व्हाट्सएप चैट और व्हाट्सएप कॉलिंग से जुड़े कई अहम इनपुट मिले हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कुछ अनजान मोबाइल नंबरों से लगातार संपर्क किया गया। इनमें एक नंबर ऐसा भी है, जिससे एक ही दिन में करीब 10 बार व्हाट्सएप कॉल की गई। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसी उन सभी नंबरों की पहचान और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

व्हाट्सएप चैट बनेगी सबसे बड़ा सबूत?

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मोबाइल फोन में मिले व्हाट्सएप संदेशों और कॉल रिकॉर्ड का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। कई चैट में कथित तौर पर खरीद प्रक्रिया, भुगतान और कमीशन से जुड़ी बातचीत के संकेत मिले हैं। हालांकि सीबीआई ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी चैट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसी इन्हें महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मानकर आगे बढ़ रही है।अधिकारियों का मानना है कि यदि इन चैट और कॉल रिकॉर्ड की पुष्टि हो जाती है, तो यह पूरे कथित कमीशन नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्लास-वन अधिकारी भी जांच के दायरे में

सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि एक क्लास-वन रेलवे अधिकारी ने भी नितेश अग्रवाल से कई बार व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए संपर्क किया था। इस जानकारी के सामने आने के बाद सीबीआई उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो खरीद प्रक्रिया या ठेकों से जुड़े मामलों में किसी न किसी स्तर पर शामिल रहे हैं।जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कॉलों का उद्देश्य क्या था और क्या इनका संबंध सरकारी खरीद, टेंडर प्रक्रिया या कथित कमीशन लेन-देन से था।

मोबाइल और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच जारी

सीबीआई ने नितेश अग्रवाल के मोबाइल फोन और लैपटॉप को कब्जे में लेकर उनकी फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। डिजिटल डाटा को रिकवर करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। जांच अधिकारी डिलीट किए गए संदेश, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी खंगाल रहे हैं।सूत्रों का कहना है कि डिजिटल डाटा से कई ऐसे सुराग मिलने की उम्मीद है, जो कथित भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क को उजागर कर सकते हैं।

ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया है कि कई ठेकेदारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया था। सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई। जिन ठेकेदारों के नाम चैट या कॉल रिकॉर्ड में सामने आए हैं, उनसे भी पूछताछ की जा सकती है।जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कहीं कथित कमीशन के बदले किसी विशेष फर्म को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया।

गोरखपुर मुख्यालय तक बढ़ी हलचल

नितेश अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद केवल वाराणसी मंडल ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर मुख्यालय में भी हलचल तेज हो गई है। रेलवे के कई अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग के भीतर भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।रेलवे प्रशासन की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद विभागीय स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

डिजिटल सबूत तय करेंगे जांच की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में मोबाइल फोन, लैपटॉप और डिजिटल कम्युनिकेशन किसी भी जांच में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। यदि व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक पुष्टि हो जाती है, तो यह जांच को नई दिशा दे सकते हैं।सीबीआई फिलहाल सभी डिजिटल साक्ष्यों का मिलान अन्य दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयानों से कर रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।

जांच के बाद हो सकते हैं बड़े खुलासे

फिलहाल सीबीआई किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और ठेकेदारों से पूछताछ की जा सकती है। यदि डिजिटल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों में समानता मिलती है, तो जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है।रेलवे में कथित कमीशनखोरी के इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित कमीशन नेटवर्क कितना बड़ा था, किन-किन लोगों की भूमिका रही और इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि मोबाइल की व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड इस हाई-प्रोफाइल जांच के सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बनकर उभरे हैं।

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