हापुड़ उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में फर्जी ITC (Input Tax Credit) क्लेम करने वाली एक फर्म के खिलाफ जीएसटी विभाग की SIB (Special Investigation Branch) टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में कथित तौर पर ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें फर्म ने ऐसी फर्मों से माल की आपूर्ति दर्शाई, जिनका जीएसटी पंजीयन पहले ही निरस्त हो चुका था। जांच के दौरान करीब 72.68 लाख रुपये के ITC क्लेम का मामला सामने आया है। कार्रवाई के बाद जीएसटी विभाग ने संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।यह मामला गढ़ क्षेत्र के अनूपपुर डिबाई स्थित फर्म से जुड़ा बताया जा रहा है। जीएसटी विभाग की टीम अब फर्म के कारोबार, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, इनवॉयस और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रही है। विभागीय कार्रवाई के बाद कारोबारी जगत में भी हड़कंप मचा हुआ है।
फर्जी ITC क्लेम का कैसे हुआ खुलासा?
जीएसटी विभाग की SIB टीम को फर्म द्वारा किए गए कारोबार और Input Tax Credit से संबंधित रिकॉर्ड में अनियमितताओं की जानकारी मिली थी। इसके बाद टीम ने फर्म से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि फर्म ने जिन कंपनियों से माल की आपूर्ति दिखाकर ITC का लाभ लिया, उनमें कुछ ऐसी फर्में शामिल थीं, जिनका जीएसटी पंजीयन पहले ही रद्द किया जा चुका था।विभागीय जांच के अनुसार, फर्म ने दिल्ली की कुछ फर्मों से सामान की आपूर्ति दिखाकर ITC क्लेम किया था। इनमें देव स्मिता इंटरप्राइजेज, JD ट्रेडर्स और जीत ट्रेडर्स के नाम सामने आए हैं।
निरस्त फर्मों से दिखाई गई आपूर्ति
जांच के दौरान जीएसटी अधिकारियों ने जिन फर्मों के रिकॉर्ड की पड़ताल की, उनमें JD ट्रेडर्स और जीत ट्रेडर्स का पंजीयन वर्ष 2024 में निरस्त होने की जानकारी सामने आई। वहीं देव स्मिता इंटरप्राइजेज का जीएसटी पंजीयन भी निरस्त पाया गया।ऐसे में इन फर्मों से आपूर्ति दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किए जाने को लेकर विभाग ने जांच तेज कर दी है। अधिकारियों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि जिन बिलों के आधार पर ITC का दावा किया गया, उनके पीछे वास्तव में माल की खरीद और आपूर्ति हुई थी या केवल दस्तावेजों के जरिए लेनदेन दिखाया गया।
72.68 लाख रुपये के ITC क्लेम की जांच
प्रारंभिक जांच में 72.68 लाख रुपये के ITC क्लेम का मामला सामने आया है। जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों को नियमों के तहत खरीद पर चुकाए गए टैक्स के आधार पर Input Tax Credit का लाभ मिलता है। हालांकि, फर्जी बिल, गलत इनवॉयस या ऐसी फर्मों से खरीद दिखाकर ITC का दावा करना, जिनका पंजीयन रद्द हो चुका है, गंभीर अनियमितता के दायरे में आ सकता है।इसी वजह से SIB टीम ने फर्म के दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। विभाग अब यह मिलान करने में जुटा है कि फर्म ने जिन खरीदारी और आपूर्ति का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है, वे वास्तविक कारोबार से संबंधित हैं या नहीं।
27 लाख रुपये विभाग के खाते में जमा
कार्रवाई के दौरान फर्म की ओर से 27 लाख रुपये विभाग के खाते में जमा कराए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह राशि किस मद में जमा की गई और अंतिम रूप से विभाग की जांच में कितनी देनदारी निर्धारित होती है, यह विस्तृत जांच के बाद स्पष्ट होगा।जीएसटी विभाग अब फर्म के पिछले कारोबार और रिटर्न की भी जांच कर सकता है। इसके साथ ही संबंधित फर्मों के बीच हुए लेनदेन, ई-वे बिल, इनवॉयस, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है।
दिल्ली की फर्मों से जुड़ा कनेक्शन
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, हापुड़ की संबंधित फर्म ने दिल्ली की फर्मों से आपूर्ति दिखाकर ITC क्लेम किया था। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन कंपनियों के बीच वास्तविक कारोबारी लेनदेन कितना हुआ था।जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जिन फर्मों से खरीद दिखाई गई, उनका पंजीयन पहले ही निरस्त हो चुका था। ऐसे में जीएसटी अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि निरस्त पंजीयन वाली फर्मों के नाम पर बनाए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और इन लेनदेन से किसे आर्थिक लाभ मिला।

दस्तावेजों की जांच में जुटी SIB टीम
SIB टीम ने कार्रवाई के दौरान फर्म से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। अब इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसमें खरीद-बिक्री के बिल, टैक्स इनवॉयस, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल और अन्य कारोबारी रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।विभागीय जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित फर्म के खिलाफ जीएसटी कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग यह भी देखेगा कि कथित रूप से गलत तरीके से लिए गए ITC की कुल राशि कितनी है और उस पर ब्याज या अन्य देनदारी बनती है या नहीं।
फर्जी ITC पर जीएसटी विभाग की सख्ती
दरअसल, सरकार और जीएसटी विभाग की ओर से फर्जी बिलिंग और बोगस ITC क्लेम के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती रही है। फर्जी इनवॉयस के जरिए टैक्स क्रेडिट लेने से सरकार को राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है। इसी कारण संदिग्ध कारोबार और असामान्य लेनदेन की जांच के लिए विभाग की जांच एजेंसियां सक्रिय रहती हैं।हापुड़ के इस मामले में भी SIB टीम की कार्रवाई को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल विभाग की विस्तृत जांच जारी है और दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
फर्म पर आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई
गढ़ क्षेत्र के अनूपपुर डिबाई में स्थित इस फर्म के खिलाफ जीएसटी विभाग की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। अधिकारियों की जांच में यदि 72.68 लाख रुपये के ITC क्लेम में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।फिलहाल 27 लाख रुपये विभाग के खाते में जमा किए जाने के बाद भी जांच जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित बोगस ITC क्लेम की वास्तविक राशि कितनी है और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग या फर्में शामिल हैं।
जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
हापुड़ में सामने आया यह मामला एक बार फिर फर्जी ITC क्लेम और निरस्त फर्मों के जरिए कथित तौर पर किए जा रहे टैक्स खेल पर सवाल खड़े करता है। SIB टीम द्वारा दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्म ने कितने रुपये का वास्तविक कारोबार किया और कितने रुपये का ITC नियमों के मुताबिक था। फिलहाल जीएसटी विभाग ने जांच आगे बढ़ा दी है और फर्म पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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