हार के बाद भी बढ़ा हरीश द्विवेदी का कद, BJP ने बनाया राष्ट्रीय महामंत्री; जानिए क्यों जताया भरोसा

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लखनऊ राजनीति में चुनावी जीत को अक्सर नेता के कद और भविष्य का पैमाना माना जाता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी में संगठन की भूमिका कई बार चुनावी नतीजों से आगे दिखाई देती है। हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से हार के बाद भी पार्टी ने उनके संगठनात्मक अनुभव पर भरोसा जताया और अब उन्हें बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।दो बार सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी की यह राजनीतिक यात्रा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि एक तरफ 2024 में बस्ती की जनता ने उन्हें संसद पहुंचने से रोक दिया, तो दूसरी तरफ पार्टी संगठन ने उन्हें पहले से बड़ी भूमिका सौंप दी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बीजेपी ने चुनावी हार के बावजूद हरीश द्विवेदी को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी?

जनता ने हराया, संगठन ने बढ़ाया कद

हरीश द्विवेदी की कहानी को समझने के लिए उनके शुरुआती राजनीतिक सफर पर नजर डालना जरूरी है। उन्होंने छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहने के बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी जिम्मेदारियां संभालीं।राजनीति के शुरुआती दौर में उन्हें चुनावी झटका भी लगा। साल 2012 में उन्होंने बस्ती सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। आम तौर पर किसी नेता के चुनावी करियर में शुरुआती हार को बड़ा झटका माना जाता है, लेकिन हरीश द्विवेदी के मामले में यह हार उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं बनी।इसके बाद भी संगठन में उनकी सक्रियता जारी रही और पार्टी ने उन्हें लगातार जिम्मेदारियां दीं।

2014 में बदली राजनीतिक तस्वीर

हरीश द्विवेदी के राजनीतिक करियर में बड़ा मोड़ साल 2014 में आया। बीजेपी ने उन्हें बस्ती लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने शानदार जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा पहुंचे।2014 की जीत के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ा और 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। उन्होंने दोबारा बस्ती से चुनाव जीतकर संसद में अपनी जगह कायम रखी।इस तरह हरीश द्विवेदी लगातार दो लोकसभा चुनाव जीतने वाले बीजेपी नेताओं में शामिल हुए। विधानसभा चुनाव की हार के बाद लोकसभा में लगातार दो जीत ने यह भी दिखाया कि उनकी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता को पार्टी किस तरह देखती है।

2024 में मिली हार, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई

साल 2024 में बीजेपी ने एक बार फिर हरीश द्विवेदी को बस्ती लोकसभा सीट से मैदान में उतारा। हालांकि इस बार चुनावी नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।दो बार सांसद रह चुके नेता के लिए यह निश्चित तौर पर बड़ा राजनीतिक झटका था। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि चुनावी हार के बाद भी पार्टी में उनकी सक्रियता कम नहीं हुई।यहीं से हरीश द्विवेदी की कहानी सामान्य चुनावी राजनीति से अलग नजर आती है। जहां चुनावी हार के बाद कई नेताओं की सक्रियता सीमित हो जाती है, वहीं हरीश द्विवेदी संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाते रहे।

असम की जिम्मेदारी ने दिया बड़ा संकेत

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने हरीश द्विवेदी को असम जैसे महत्वपूर्ण राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी भी दी। यह संकेत था कि बीजेपी उनके चुनावी प्रदर्शन के साथ-साथ संगठन में उनके लंबे अनुभव और काम करने की क्षमता को भी महत्व दे रही है।बीजेपी की राजनीति में राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारियां काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अलग-अलग राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाना और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाना संगठन के प्रमुख कामों में शामिल होता है।ऐसे में असम की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह साफ हुआ कि 2024 की चुनावी हार के बावजूद पार्टी का भरोसा हरीश द्विवेदी पर कायम है।

हार के बाद भी बढ़ा हरीश द्विवेदी का कद
हार के बाद भी बढ़ा हरीश द्विवेदी का कद

अब राष्ट्रीय महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी

अब साल 2026 में बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। यह जिम्मेदारी पार्टी संगठन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर उनकी भूमिका केवल किसी एक लोकसभा क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें पार्टी के व्यापक संगठनात्मक कामकाज में भूमिका निभानी होगी। कार्यकर्ताओं से संवाद, संगठन के विस्तार, राज्यों में पार्टी की गतिविधियों और चुनावी तैयारियों जैसे कई मोर्चों पर राष्ट्रीय स्तर पर काम करना होगा।यही वजह है कि बस्ती लोकसभा चुनाव में मिली हार के बावजूद राष्ट्रीय संगठन में उनकी पदोन्नति को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BJP ने बनाया राष्ट्रीय महामंत्री
BJP ने बनाया राष्ट्रीय महामंत्री

बीजेपी ने हरीश द्विवेदी पर क्यों जताया भरोसा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी ने हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी क्यों दी?इसका एक बड़ा कारण उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव माना जा सकता है। उन्होंने छात्र संगठन से लेकर युवा मोर्चा और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी के साथ काम किया है।दूसरा पहलू उनका चुनावी अनुभव है। वह दो बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं और कई चुनावी परिस्थितियों को करीब से देख चुके हैं। ऐसे अनुभव का इस्तेमाल संगठनात्मक रणनीति तैयार करने में किया जा सकता है।तीसरा महत्वपूर्ण पहलू अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने का अनुभव है। बीजेपी जैसी कैडर आधारित पार्टी में जमीनी संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की क्षमता को महत्वपूर्ण माना जाता है।इस लिहाज से देखा जाए तो हरीश द्विवेदी की राजनीतिक प्रोफाइल में चुनावी अनुभव और संगठनात्मक अनुभव, दोनों मौजूद हैं।

क्या चुनावी हार से ज्यादा अहम है संगठन?

हरीश द्विवेदी की नई जिम्मेदारी बीजेपी की राजनीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को भी सामने लाती है। पार्टी में चुनाव जीतना निश्चित तौर पर अहम है, लेकिन संगठन को मजबूत करने वाले नेताओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।उनका उदाहरण बताता है कि किसी नेता की राजनीतिक उपयोगिता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसने पिछला चुनाव जीता या हारा। संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता भी पार्टी के फैसलों में महत्वपूर्ण हो सकती है।यही वजह है कि 2024 की हार के बाद भी हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर रुका नहीं, बल्कि उन्हें लगातार बड़ी जिम्मेदारियां मिलती गईं।

2012 से 2026 तक का सियासी सफर

अगर हरीश द्विवेदी के राजनीतिक सफर को कुछ अहम पड़ावों में समझें तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है।

2012 — बस्ती सदर विधानसभा चुनाव में हार।

2014 — बस्ती लोकसभा सीट से पहली बार सांसद निर्वाचित।

2019 — बस्ती से दोबारा लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

2024 — बस्ती लोकसभा चुनाव में हार का सामना।

2024 के बाद — संगठन में सक्रिय भूमिका और असम की जिम्मेदारी।

2026 — बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी।

यानी चुनावी राजनीति में उतार-चढ़ाव के बावजूद संगठन के स्तर पर उनका कद लगातार बढ़ता गया।

2027 के चुनाव में भी हो सकती है अहम भूमिका

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी धीरे-धीरे राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ रही हैं। ऐसे समय में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने से उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि उनकी नई जिम्मेदारी को सीधे 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन संगठन में उनकी भूमिका निश्चित तौर पर पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम होगी।आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी उन्हें किन राज्यों या चुनावी क्षेत्रों में विशेष जिम्मेदारी देती है और पार्टी के संगठनात्मक अभियान में उनका इस्तेमाल किस तरह करती है।

बस्ती ने रोका संसद का रास्ता, बीजेपी ने खोला संगठन का दरवाजा

हरीश द्विवेदी की राजनीतिक कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि 2024 में बस्ती की जनता ने उन्हें संसद पहुंचने से रोक दिया, लेकिन इसके बाद बीजेपी संगठन ने उनके लिए नई राजनीतिक भूमिका का रास्ता खोल दिया।दो बार सांसद रहने के बाद चुनावी हार और फिर राष्ट्रीय महामंत्री का पद—यह सफर बताता है कि राजनीति में एक चुनाव का नतीजा हमेशा अंतिम फैसला नहीं होता।हरीश द्विवेदी के लिए 2024 की हार भले ही चुनावी झटका रही हो, लेकिन संगठन के स्तर पर उनका सफर लगातार आगे बढ़ता रहा। अब राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उनके सामने पार्टी को मजबूत करने और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाने की बड़ी चुनौती है।सियासत में कहा जाता है कि चुनाव हारना राजनीतिक सफर का अंत नहीं होता। हरीश द्विवेदी का मौजूदा सफर इसी बात का उदाहरण है। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय महामंत्री की नई जिम्मेदारी में वह बीजेपी के संगठन को कितना मजबूत करते हैं और आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति में उनकी भूमिका कितनी बड़ी होती है।

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