11 हजार वोल्ट की चपेट में मासूम की मौत! खेलते-खेलते बुझ गया 10 साल के अख़लाक़ का जीवन, ग्रामीणों में आक्रोश

Editorial
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रिपोर्ट:संतोष कुमार अग्रहरी

सिद्धार्थनगर जिले के भवानीगंज थाना क्षेत्र के भड़रिया गांव में बुधवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घर के सामने खेल रहे 10 वर्षीय मासूम अख़लाक़ की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गया। परिजन आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बेंवा लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई, जबकि पूरे गांव में मातम छा गया।इस हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा बिजली विभाग के खिलाफ फूट पड़ा। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि 11 हजार वोल्ट का तार लंबे समय से जमीन के बेहद करीब झूल रहा था, जिसकी कई बार शिकायत भी की गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते तार को दुरुस्त कर दिया जाता, तो आज एक मासूम की जान बच सकती थी।

घर के सामने खेलते समय हुआ दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार, भड़रिया गांव निवासी 10 वर्षीय अख़लाक़ बुधवार को अपने घर के सामने स्थित शिव मंदिर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह उस स्थान के करीब पहुंच गया, जहां 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन का तार असामान्य रूप से नीचे लटक रहा था।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही बालक तार की चपेट में आया, तेज धमाके जैसी आवाज हुई और वह गंभीर रूप से झुलसकर जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और परिजनों की मदद से मासूम को अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

गंभीर रूप से झुलसे अख़लाक़ को तत्काल सीएचसी बेंवा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के इस ऐलान के बाद परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल में मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।मासूम की मौत की खबर गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल और उसके घर पहुंच गए। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

बिजली विभाग पर फूटा गुस्सा

हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गांव से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन का तार लंबे समय से नीचे झूल रहा था, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका कहना है कि विभाग की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली।ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते तार की मरम्मत कर दी जाती या उसे सुरक्षित ऊंचाई पर कर दिया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

10 वर्षीय अख़लाक़ की असमय मौत से उसके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन बार-बार यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी क्या गलती थी और एक मासूम को अपनी जान क्यों गंवानी पड़ी।मासूम की मां बेसुध हो गई, जबकि पिता और अन्य परिजन गहरे सदमे में हैं। गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाने का प्रयास करती रहीं, लेकिन परिवार का दर्द कम नहीं हो सका।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई और मुआवजे की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से बिजली विभाग की लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे होते रहेंगे।ग्रामीणों ने मृतक परिवार को आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग की है, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिल सके।

हाईटेंशन लाइनें बनीं खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में हाईटेंशन बिजली लाइनें सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कहीं तार नीचे झूल रहे हैं तो कहीं खंभे जर्जर हालत में हैं। ऐसे में हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।स्थानीय लोगों ने मांग की कि पूरे क्षेत्र में हाईटेंशन लाइनों का सर्वे कराया जाए और जहां भी तार नीचे लटक रहे हैं, उन्हें तत्काल ठीक कराया जाए।

प्रशासन से उठे बड़े सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी खतरनाक बिजली लाइन लंबे समय तक नीचे कैसे लटकी रही? यदि शिकायतें पहले से की जा रही थीं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विभागों की लापरवाही का खामियाजा एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। अब लोगों की नजर प्रशासन और बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है।यदि जांच में विभागीय लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है। फिलहाल पूरे गांव में शोक का माहौल है और हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—क्या समय रहते बिजली विभाग जाग जाता, तो क्या 10 वर्षीय अख़लाक़ आज जिंदा होता?

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