लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कलां का विवादित ढांचा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सावन के पहले सोमवार को यहां उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कथित विवादित स्थल पर जलाभिषेक करने पहुंचे। प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और विवादित स्थल से लगभग 200 मीटर पहले बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग के सामने सांकेतिक जलाभिषेक किया और शांतिपूर्वक वापस लौट गए।यह घटना ऐसे समय हुई है जब कसमंडी कलां का विवाद पहले से ही प्रशासन, स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया था।
- 108 गांवों की मिट्टी और जल लेकर पहुंचे समर्थक
- बैरिकेडिंग पर बैठ गए प्रदर्शनकारी
- एसीपी ने समझाया, फिर हुआ सांकेतिक जलाभिषेक
- क्या है कसमंडी कलां का पूरा विवाद?
- 21 मई से लगातार उठ रहा है मुद्दा
- पहले भी हो चुके हैं विरोध प्रदर्शन
- सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
- दोनों पक्षों के दावों के बीच प्रशासन की भूमिका
- स्थानीय लोगों में भी बनी हुई है चर्चा
108 गांवों की मिट्टी और जल लेकर पहुंचे समर्थक
जानकारी के अनुसार, लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ दोपहर करीब 12 बजे कसमंडी कलां पहुंचे। संगठन का दावा था कि 108 गांवों से एकत्रित की गई पवित्र मिट्टी और जल से विवादित स्थल पर जलाभिषेक किया जाएगा।हालांकि प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रखी थी। पुलिस ने विवादित परिसर से काफी पहले बैरिकेडिंग कर किसी को भी आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इससे मौके पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया।
बैरिकेडिंग पर बैठ गए प्रदर्शनकारी
जब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका तो सूरज पासी और उनके समर्थक बैरिकेडिंग के सामने धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग की।मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने की अपील की और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए विवादित स्थल की ओर जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
एसीपी ने समझाया, फिर हुआ सांकेतिक जलाभिषेक
मलिहाबाद के एसीपी ज्ञानेंद्र सिंह ने काफी देर तक सूरज पासी और अन्य पदाधिकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष को विवादित स्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।वार्ता के बाद सूरज पासी ने बैरिकेडिंग के सामने ही सांकेतिक रूप से जलाभिषेक किया। लगभग आधे घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद लाखन आर्मी के कार्यकर्ता शांतिपूर्वक वहां से लौट गए। इस दौरान कहीं से भी हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सूचना नहीं मिली।
क्या है कसमंडी कलां का पूरा विवाद?
मलिहाबाद के कसमंडी कलां गांव में स्थित एक परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
- पासी समाज का दावा है कि यह स्थान उनके पूर्वज महाराजा कंस पासी के प्राचीन किले और एक प्राचीन शिव मंदिर का हिस्सा था। उनका कहना है कि परिसर की दीवारों और खंभों पर हिंदू धार्मिक प्रतीकों और प्राचीन कलाकृतियों के अवशेष आज भी मौजूद हैं।
- दूसरे पक्ष का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में यह स्थान मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है और लंबे समय से धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग होता रहा है।
इसी दावे और प्रतिदावे के चलते यह मामला पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में बना हुआ है।
21 मई से लगातार उठ रहा है मुद्दा
यह विवाद पहली बार नहीं उठा है। इससे पहले 21 मई को लाखन आर्मी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विवादित ढांचे की ऐतिहासिक जांच की मांग की थी।संगठन ने दावा किया था कि परिसर में मौजूद दीवारों और खंभों पर प्राचीन हिंदू स्थापत्य कला के प्रमाण दिखाई देते हैं। साथ ही विवादित ढांचे की कार्बन डेटिंग कराने की मांग भी की गई थी ताकि स्थल के वास्तविक इतिहास का पता लगाया जा सके।इसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया था।

पहले भी हो चुके हैं विरोध प्रदर्शन
कसमंडी विवाद को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।बताया जाता है कि एक चरण में प्रशासन ने विवादित परिसर में नमाज पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। इसके बाद विभिन्न संगठनों की ओर से वहां धार्मिक गतिविधियां आयोजित करने की कोशिशें भी हुईं।योगेश पासी ने पहले विवादित स्थल पर हनुमान चालीसा पढ़ने का प्रयास किया था। वहीं 27 मई को सूरज पासी ने परिसर के निकट धरना देकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी।सावन के पहले सोमवार को हुआ यह प्रदर्शन उसी क्रम की अगली कड़ी माना जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
संभावित तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पहले से पूरी तरह सतर्क थे। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए थे। आने-जाने वाले रास्तों पर निगरानी रखी गई और बैरिकेडिंग कर सुरक्षा घेरा बनाया गया।प्रशासन का कहना है कि उनका पहला उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव को रोकना है।
दोनों पक्षों के दावों के बीच प्रशासन की भूमिका
कसमंडी कलां विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक और धार्मिक दावे कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय सक्षम न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधार पर ही होता है।प्रशासन ने फिलहाल विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी नई गतिविधि को अनुमति न देने का रुख अपनाया है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
स्थानीय लोगों में भी बनी हुई है चर्चा
कसमंडी विवाद अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। पिछले कुछ महीनों में यह मामला प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। सावन के पहले सोमवार को हुए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर लोगों की नजर इस विवाद पर टिक गई है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को सभी पक्षों से संवाद बनाए रखते हुए ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे क्षेत्र की शांति और सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।सावन के पहले सोमवार को कसमंडी कलां में जलाभिषेक की कोशिश ने एक बार फिर इस विवाद को सुर्खियों में ला दिया। हालांकि प्रशासन की सतर्कता और पुलिस की मौजूदगी के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। लाखन आर्मी ने सांकेतिक जलाभिषेक कर अपना विरोध दर्ज कराया और वापस लौट गई।अब इस पूरे मामले पर आगे प्रशासन, न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के कदम महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कसमंडी कलां का विवादित ढांचा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति, इतिहास और कानून-व्यवस्था के केंद्र में आ गया है।
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