कटनी की चर्चित CSP नेहा पच्चीसिया पर भ्रष्टाचार के आरोपों का शिकंजा: अवैध वसूली केस की जांच जबलपुर ट्रांसफर, बढ़ीं मुश्किलें

Editorial
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कटनी मध्य प्रदेश के कटनी जिले में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कार्यशैली नहीं बल्कि उन पर लगे गंभीर आरोप हैं। ट्रांसपोर्टर से कथित अवैध वसूली के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने जांच को कटनी से हटाकर जबलपुर स्थानांतरित कर दिया है। अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनु बेनीवाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगी।यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नेहा पच्चीसिया कभी अपनी ईमानदार छवि, बेहतर कानून-व्यवस्था और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित हो चुकी हैं। लेकिन अब उन्हीं पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे आरोप लगने से पुलिस विभाग में हलचल मच गई है।

जांच कटनी से हटाकर जबलपुर भेजी गई

सूत्रों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन की शिकायत के बाद पहले इस मामले की जांच कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य कर रहे थे। लेकिन शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीधे सीएसपी पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद आईजी ने दोनों प्रमुख मामलों की जांच कटनी पुलिस से हटाकर जबलपुर की एएसपी अनु बेनीवाल को सौंप दी।शुक्रवार को शिकायतकर्ता और कई गवाह जबलपुर पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराने वाले हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बाहरी जिले के अधिकारी द्वारा जांच कराए जाने से निष्पक्षता बनी रहेगी।

क्या हैं आरोप?

ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन का आरोप है कि 21 जुलाई की रात उनकी हाईवा गाड़ी की चेकिंग के दौरान सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने कथित रूप से 30 हजार रुपये की मांग की।

शिकायत के अनुसार—

  • मौके पर 25 हजार रुपये नकद लिए गए।
  • बाकी 5 हजार रुपये अगले दिन चालक के माध्यम से मंगवाए गए।
  • पैसे नहीं देने पर वाहन जब्त कर कार्रवाई करने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज और कथित साक्ष्य भी पुलिस अधीक्षक को सौंपे तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।

पहली कार्रवाई में चालक निलंबित

शिकायत सामने आने के बाद कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रारंभिक जांच के आधार पर सीएसपी के चालक आरक्षक केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।साथ ही पूरे मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई थी। अब जांच जबलपुर स्थानांतरित होने के बाद आगे की कार्रवाई वहां से होगी।

तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया

मामले के बीच प्रशासन ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अधिकार क्षेत्र में शामिल कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थानों का प्रभार वापस ले लिया।इन तीनों थानों की जिम्मेदारी अब अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंप दी गई है। इसे प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कौन हैं नेहा पच्चीसिया?

नेहा पच्चीसिया मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर क्षेत्र के एक साधारण शिक्षक परिवार से आती हैं।उनके पिता शिक्षक हैं जबकि माता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।वर्ष 2012 से 2016 के बीच उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं और 2016 में एक साथ चार चयन प्रक्रियाओं में सफलता हासिल की। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा में उन्होंने 20वीं रैंक प्राप्त कर डीएसपी पद हासिल किया।

एयर होस्टेस की नौकरी छोड़ बनीं पुलिस अधिकारी

बहुत कम लोग जानते हैं कि नेहा पच्चीसिया पहले एयर होस्टेस रह चुकी हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया।पहली सरकारी नौकरी महिला एवं बाल विकास विभाग में मिली, लेकिन उनका लक्ष्य पुलिस सेवा था। लगातार मेहनत के बाद वे डीएसपी बनीं और अपनी कार्यशैली के कारण जल्द ही चर्चा में आ गईं।

कोरोना काल में मिली थी सराहना

कोरोना महामारी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रभावी पुलिसिंग के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके कार्यों की सराहना की थी।एक समय उन्हें मध्य प्रदेश की चर्चित और तेजतर्रार महिला पुलिस अधिकारियों में गिना जाता था।

अब विवादों में क्यों हैं?

पिछले कुछ समय से नेहा पच्चीसिया का नाम कई विवादों से जुड़ता रहा है। ताजा मामला ट्रांसपोर्टर से कथित अवैध वसूली का है, जिसने उनके करियर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।हालांकि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

जबलपुर में दर्ज होंगे गवाहों के बयान

सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता महेंद्र जैन सहित कई गवाह शुक्रवार को जबलपुर पहुंचकर एएसपी अनु बेनीवाल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराएंगे।जांच अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों, कथित साक्ष्यों, संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच करेंगी।

पुलिस विभाग की साख पर उठे सवाल

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे आरोप लगना केवल व्यक्तिगत मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे पूरे पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती होगी। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे संबंधित अधिकारी की छवि भी साफ होगी।

जांच पर टिकी सबकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले की निगाहें जबलपुर में चल रही जांच पर टिकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।अब यह जांच तय करेगी कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं यदि आरोप साबित नहीं होते, तो उन्हें क्लीन चिट मिल सकती है। ऐसे में यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस के लिए आने वाले दिनों में सबसे चर्चित मामलों में से एक बन गया है।

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