हजरतगंज में सपा का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

Editorial
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लखनऊ राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी की तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया।प्रदर्शन के दौरान हजरतगंज चौराहे पर कुछ समय के लिए माहौल राजनीतिक नारों से गूंजता रहा। सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हजरतगंज में सपा का प्रदर्शन
हजरतगंज में सपा का प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

सपा कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विरोध के बीच हुआ। विपक्षी दल SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।2 अक्टूबर को दिल्ली सहित कई स्थानों पर भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।लखनऊ में सपा कार्यकर्ताओं ने भी इसी मुद्दे को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए चुनावी अनियमितता संबंधी आरोपों को प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया। इस कार्रवाई की पुष्टि स्थानीय रिपोर्टों में भी की गई है।पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। हालांकि, सपा कार्यकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। इस तरह हजरतगंज का प्रदर्शन केवल स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव आयोग को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस से भी जुड़ गया।

SIR को लेकर विपक्ष उठा रहा सवाल

वर्तमान राजनीतिक विवाद का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं।चुनाव आयोग की ओर से SIR को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सत्यापन और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के रूप में पेश किया गया है। इसलिए इस पूरे विवाद में अलग-अलग पक्षों के दावों को उनके स्रोत और संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।

लखनऊ में पहले भी हो चुके हैं प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ में इससे पहले भी विपक्षी दलों के प्रदर्शन हो चुके हैं। 28 सितंबर को भी हजरतगंज में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के पुतले पर कालिख पोतकर विरोध जताया था और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा था।इससे कुछ दिन पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी लखनऊ में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी थी और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विपक्षी दलों की राजनीतिक गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं।

हजरतगंज में बढ़ाई गई सुरक्षा

प्रदर्शन को देखते हुए हजरतगंज चौराहे पर पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद उन्हें ईको गार्डन भेज दिया गया।हजरतगंज राजधानी का प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक क्षेत्र है। ऐसे में यहां होने वाले राजनीतिक प्रदर्शन का असर आसपास की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।

सपा कार्यकर्ताओं ने क्या उठाए सवाल?

प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदाताओं से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।सपा का यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब विपक्षी दल देश के अलग-अलग हिस्सों में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी 2 से 8 अक्टूबर के बीच सहयोगी दलों के साथ संयुक्त आंदोलन की योजना बनाई है।राजनीतिक दलों के आरोप और मांगें उनके राजनीतिक रुख का हिस्सा हैं। इनके आधार पर चुनाव आयोग या किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वतः प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

आगे भी जारी रह सकता है विरोध

हजरतगंज में हुए प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है। सपा कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन करने की बात कह रहे हैं।दूसरी ओर, देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं। SIR, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आने वाले दिनों में भी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।फिलहाल लखनऊ के हजरतगंज में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में सपा कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद राजधानी में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं।

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