MP हनी ट्रैप मामला:श्वेता जैन पर फिर गिरोह बनाने का आरोप, बिल्डर-ठेकेदार थे निशाने पर

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मध्य प्रदेश का चर्चित हनीट्रैप मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस के मुताबिक, पुराने मामले में नाम सामने आने के बाद श्वेता जैन ने कथित तौर पर नया गिरोह तैयार किया। इस बार गिरोह के निशाने पर इंदौर और उज्जैन के बिल्डर, ठेकेदार और अन्य रसूखदार लोग बताए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश का चर्चित हनीट्रैप मामला : श्वेता जैन पर फिर गिरोह बनाने का आरोप

मध्य प्रदेश में चर्चित रहे हनीट्रैप मामले में एक बार फिर श्वेता जैन का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, श्वेता जैन पर जेल से बाहर आने के बाद दोबारा गिरोह तैयार कर हनीट्रैप के जरिए लोगों को फंसाने और कथित तौर पर वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल करने की साजिश रचने का आरोप है।पुलिस की जांच के मुताबिक, इस बार कथित गिरोह का नेटवर्क सागर से संचालित किया जा रहा था और इंदौर-उज्जैन समेत आसपास के शहरों में प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की तैयारी थी। पुलिस ने मामले में कोर्ट के सामने करीब 600 पेज का पूरक चालान पेश किया है। इसमें श्वेता जैन को कथित गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है।

शराब ठेकेदार को फंसाने का आरोप, मांगे गए एक करोड़ रुपये

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, गिरोह ने इंदौर के शराब ठेकेदार पिंटू ठाकुर को निशाना बनाया। पुलिस का दावा है कि गिरोह की सदस्य रेशू ने ठेकेदार से नजदीकी बढ़ाई और कथित तौर पर स्पाई कैमरे के जरिए वीडियो रिकॉर्ड किए गए।इसके बाद इन वीडियो का इस्तेमाल कथित रूप से ब्लैकमेलिंग के लिए करने की योजना बनाई गई। पुलिस के अनुसार, सौदेबाजी के लिए अलका दीक्षित को भी गिरोह से जोड़ा गया था।आरोप है कि 28 अप्रैल की रात पिंटू ठाकुर को उनके साथियों के साथ रोका गया और उनसे कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई। उन्हें पैसे देने या प्रॉपर्टी में साझेदारी करने का विकल्प दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित तौर पर मांग पूरी नहीं करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।हालांकि इन सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में गवाहों और सबूतों के आधार पर होना है।

सागर की रेशू को बनाया गया कथित ‘हनीट्रैप गर्ल’

पुलिस जांच के अनुसार, श्वेता जैन ने सागर की रहने वाली रेशू को कथित गिरोह में शामिल किया था। आरोप है कि उसे नेताओं, ठेकेदारों और अन्य रसूखदार लोगों से संपर्क बढ़ाने के लिए कहा गया।पुलिस को संदेह है कि इसी तरीके से इंदौर और उज्जैन सहित बड़े शहरों में प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी।जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गिरोह ने किन-किन लोगों से संपर्क किया था और कितने लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

श्वेता के घर छापे में मिले मोबाइल और कैमरे

शराब ठेकेदार की शिकायत के बाद इंदौर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने सागर स्थित श्वेता जैन के घर पर छापा मारकर कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 9 मोबाइल फोन, कैमरे, मेमोरी कार्ड, पेन कैमरे और बटन कैमरे समेत अन्य सामान बरामद किया गया। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों के वीडियो रिकॉर्ड करने में किया जाता था।अब पुलिस जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। इसके आधार पर कथित गिरोह के नेटवर्क और उसके सदस्यों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

चार साल पहले भी सामने आया था श्वेता जैन का नाम

श्वेता जैन का नाम इससे पहले भी मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले में सामने आ चुका है। करीब चार साल पहले सामने आए इस मामले में कई अफसरों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाने के आरोप लगे थे।पुलिस जांच में आरोप लगाया गया था कि श्वेता जैन ने आरती दयाल को अपने संपर्क में लेकर गिरोह में शामिल किया। इसके बाद आरती के जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को कथित तौर पर हनीट्रैप में फंसाया गया।आरोपों के मुताबिक, हरभजन सिंह के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया गया था, जहां कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद उनसे पैसों की मांग किए जाने की बात सामने आई थी।शिकायत के बाद पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इस मामले ने पूरे मध्य प्रदेश में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।बाद में हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। उनकी मौत का उल्लेख पुराने मामले के संदर्भ में किया जाता रहा है, हालांकि किसी भी घटना को दूसरे मामले से जोड़ने से पहले आधिकारिक जांच और न्यायिक निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं।

अब पुलिस की नजर कथित मददगारों पर

नए मामले में पुलिस ने करीब 600 पेज का पूरक चालान कोर्ट में दाखिल किया है। अब अदालत में गवाहों के बयान और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी।पुलिस कथित गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में अगर किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था, किन लोगों को निशाना बनाया गया और इस पूरी साजिश में श्वेता जैन के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस की आगे की जांच और अदालत में होने वाली सुनवाई से इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।मध्य प्रदेश का यह नया हनीट्रैप मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस के अनुसार इसमें पुराने मामले से जुड़ा नाम दोबारा सामने आया है। हालांकि, श्वेता जैन और अन्य आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

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