कानपुर के मंधना फ्लाईओवर की सर्विस लेन पर रविवार की दोपहर कुछ ही सेकंड में एक खुशहाल परिवार की दुनिया उजड़ गई। चिलचिलाती धूप में बच्चों के लिए दूध लेने निकले अवनीश यादव को शायद अंदाजा भी नहीं था कि यह उनका आखिरी सफर होगा। पिता ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, समझाया था कि अभी धूप बहुत तेज है, बच्चों को आराम करने दो और शाम को चले जाना। लेकिन अवनीश ने शायद सोचा होगा कि कुछ ही देर की बात है। वह बच्चों को लेकर बाइक से निकल पड़े और फिर कभी घर वापस नहीं लौट सके। हादसा इतना भयावह था कि जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप उठी। मंधना फ्लाईओवर की सर्विस लेन पर गलत दिशा से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और अवनीश समेत सभी लोग सड़क पर दूर-दूर जा गिरे। हादसे में अवनीश और एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर सवार तीन मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। जब हादसे की खबर घर पहुंची तो मानो पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता बाबादीन अस्पताल पहुंचे तो बेटे का शव देखकर खुद को संभाल नहीं सके। उनकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। वह बार-बार यही कह रहे थे, “मैंने मना किया था बेटा… मैंने कहा था अभी मत जाओ। मैं यहीं बैठा रहा और तुम चले गए। सब कुछ खत्म हो गया।” यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगे। गुस्से और दर्द के बीच उन्होंने अपना मोबाइल फोन जमीन पर पटक दिया, जो टूटकर बिखर गया। आसपास मौजूद लोग उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयान करना आसान नहीं था। बाबादीन ने रोते हुए बताया कि उन्होंने अपने हाथों से बच्चों को दूध पिलाया था। वह चाहते थे कि बच्चे थोड़ी देर आराम कर लें और फिर शाम को बाजार चले जाएं। लेकिन किसे पता था कि यह जिद जिंदगी पर भारी पड़ जाएगी। उनका बार-बार यही कहना था कि अगर बेटा उनकी बात मान लेता, तो शायद आज वह उनके सामने जिंदा होता।

उधर जैसे ही हादसे की जानकारी मां संजय देवी को मिली, वह बदहवास हालत में हैलट अस्पताल पहुंचीं। वहां बेटे को मृत घोषित किए जाने की खबर सुनते ही उनकी चीख निकल गई। वह बहू अर्चना और बबिता के साथ अस्पताल के फर्श पर ही बैठकर रोने लगीं। तीनों महिलाएं एक-दूसरे से लिपटकर बिलखती रहीं। वहां मौजूद लोग इस दर्दनाक दृश्य को देखकर अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक सके।मां संजय देवी बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। होश में आने पर वह चिल्लाते हुए कहतीं, “अवनीश मुझे बुला रहा है… कह रहा है मम्मी आ जाओ… उसे जाने दो, मुझे उसके पास जाना है।” उनकी यह पुकार सुनकर अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। महिला सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन मां के दर्द के सामने हर सांत्वना छोटी पड़ रही थी। हादसे में घायल बच्चों की हालत भी बेहद गंभीर बनी हुई है। जितेंद्र का बेटा हरिओम उर्फ अनुभव जब खून से लथपथ हालत में अस्पताल पहुंचा तो उसके पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। डॉक्टरों ने बच्चे को ऑक्सीजन पर रखा। उसकी हालत देखकर पिता बुरी तरह टूट गए। बताया जाता है कि बच्चे की सांसें उखड़ने लगीं तो परिवार के लोग उसे हिम्मत देने के लिए उसके पास खड़े रहे। अस्पताल का वह दृश्य इतना भावुक था कि डॉक्टरों और कर्मचारियों की आंखें भी नम हो गईं। इधर हादसे के बाद घटनास्थल का एक 18 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में तपती दोपहर के बीच हाईवे पर बिखरे मासूम बच्चे, क्षतिग्रस्त बाइक और सड़क पर पड़े घायल लोगों को देखकर हर कोई सन्न रह गया। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंधना फ्लाईओवर ही नहीं, बल्कि सचेंडी, पनकी, बर्रा, नौबस्ता, चकेरी, महाराजपुर और रामादेवी से आईआईटी तक के हाईवे पर रोजाना सैकड़ों वाहन गलत दिशा में दौड़ते हैं। पिकअप, लोडर, ऑटो और ई-रिक्शा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। जब कोई बड़ा हादसा होता है, तभी प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस सक्रिय नजर आती है।इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक गलत दिशा में दौड़ते वाहन लोगों की जिंदगी छीनते रहेंगे? कब तक परिवार यूं ही अपनों को खोकर बिलखते रहेंगे? और कब ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा?फिलहाल एक पिता की आंखों के सामने बेटे की यादें हैं, एक मां की पुकार है जो अब कभी पूरी नहीं होगी और तीन मासूम बच्चे हैं, जो जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में संघर्ष कर रहे हैं। मंधना फ्लाईओवर पर हुआ यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
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