अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया। बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इसके साथ ही ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किए जाने की भी घोषणा की गई।जीतेंद्र मिश्रा का नाम सामने आते ही उनके सैन्य करियर और अनुभव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके मिश्रा अब राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। खास बात यह है कि उनका संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र स्थित भोपतपुरा गांव से है।
ट्रस्ट की बैठक में हुआ बड़ा फैसला
अयोध्या की मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में ट्रस्ट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों और आमंत्रित सदस्यों की मौजूदगी में राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर फैसला लिया गया।ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया। राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ अब मंदिर के नियमित संचालन, प्रशासन और विभिन्न व्यवस्थाओं के बेहतर समन्वय पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।इसी बैठक में ट्रस्ट के तीन नए सदस्यों के नामों की भी घोषणा की गई। इनमें मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव शामिल हैं। मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव अयोध्या से हैं, जबकि महेश भागचंदका दिल्ली से जुड़े हैं।

कौन हैं एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर बेहद लंबा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा है। वह मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया था।करीब चार दशक के अपने सैन्य करियर में उन्होंने भारतीय वायुसेना में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव बताया जाता है।उनके करियर में कमांड और नेतृत्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी शामिल रही हैं। वह कमांडिंग-इन-चीफ स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया।
अमेरिका और ब्रिटेन में भी लिया प्रशिक्षण
जीतेंद्र मिश्रा के सैन्य अनुभव का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में प्रशिक्षण हासिल किया। इस दौरान उन्हें आधुनिक सैन्य प्रबंधन, नेतृत्व और संगठनात्मक कार्यप्रणाली से जुड़े अनुभव मिले।अब यही प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमता राम मंदिर के प्रबंधन में उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि मंदिर प्रबंधन सैन्य सेवा से बिल्कुल अलग क्षेत्र है, लेकिन बड़े संगठन में अनुशासन, टीम प्रबंधन, समन्वय और व्यवस्था बनाए रखने का अनुभव इस भूमिका में उपयोगी माना जा रहा है।
राम मंदिर CEO के सामने होंगी ये बड़ी जिम्मेदारियां
राम मंदिर के पहले CEO के तौर पर जीतेंद्र मिश्रा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। मंदिर के निर्माण से आगे अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, प्रशासन, सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, सुविधाओं के संचालन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।अयोध्या अब देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में आने वाले समय में और विस्तार होने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा से लेकर व्यवस्थाओं के बेहतर संचालन तक कई स्तरों पर समन्वय की जरूरत होगी।CEO का पद इसी तरह के प्रशासनिक और संचालन संबंधी कामों को एक व्यवस्थित ढांचे में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
देवरिया के गांव से राम मंदिर की बड़ी जिम्मेदारी तक
जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की सबसे खास बात उनके करियर का सफर भी है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शुरुआत करने वाले मिश्रा ने सैन्य सेवा में उच्च स्तर की जिम्मेदारियां संभालीं।अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अयोध्या स्थित राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इससे उनका नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है।
तीन नए सदस्यों से भी मजबूत होगा ट्रस्ट
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों को शामिल किए जाने का फैसला भी अहम माना जा रहा है। मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव के शामिल होने के बाद ट्रस्ट की संरचना में भी विस्तार हुआ है।एक ओर जहां ट्रस्ट ने नए सदस्यों को जिम्मेदारी दी है, वहीं दूसरी ओर पहले CEO की नियुक्ति से मंदिर के प्रशासनिक संचालन के लिए एक अलग नेतृत्व व्यवस्था सामने आई है।
क्यों महत्वपूर्ण है CEO की नियुक्ति?
राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद इसकी गतिविधियां केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने वाली हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर प्रशासन, कर्मचारी व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और लगातार बढ़ती व्यवस्थाओं को संभालने के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता होगी।ऐसे में पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को पेशेवर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।देवरिया के भोपतपुरा गांव से भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे जीतेंद्र मिश्रा अब अयोध्या के राम मंदिर के पहले CEO के रूप में नई भूमिका निभाएंगे। सैन्य सेवा के लंबे अनुभव के बाद उनके सामने अब दुनिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो रहे राम मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी होगी।
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