नई दिल्ली सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय रेलवे के एक विशेष सैलून कोच का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ट्रेन के भीतर पूरे विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना होती दिखाई दे रही है। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार, पूजा सामग्री और धार्मिक अनुष्ठान का दृश्य देखकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या अब भारतीय रेलवे की चलती ट्रेनों में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं? क्या रेलवे ने इसकी अनुमति दी थी या फिर यह नियमों का उल्लंघन है?वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और आस्था से जोड़कर सराहा, तो कई यूजर्स ने रेलवे के नियमों और सार्वजनिक परिवहन में धार्मिक आयोजनों को लेकर सवाल खड़े किए।
देखते ही देखते मामला इतना चर्चा में आ गया कि उत्तर रेलवे को इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।उत्तर रेलवे ने साफ किया कि वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच का नहीं है, बल्कि एक विशेष सैलून कोच का है। रेलवे के अनुसार यह कोच निजी उपयोग के लिए पूरी तरह नियमों के तहत बुक कराया गया था। संबंधित पार्टी ने आईआरसीटीसी (IRCTC) के माध्यम से सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए करीब 3.08 लाख रुपये का भुगतान कर इस सैलून कोच को आरक्षित कराया था।रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सैलून कोच सामान्य यात्री डिब्बों से अलग होते हैं। इन्हें विशेष अवसरों, निजी यात्रा, आधिकारिक दौरे या विशेष आयोजनों के लिए नियमों के तहत किराये पर लिया जा सकता है। ऐसे कोच में बुकिंग कराने वाले समूह को सीमित दायरे में अपनी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति होती है, बशर्ते वे रेलवे के सुरक्षा और संचालन संबंधी नियमों का पालन करें।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह बुक किए गए निजी सैलून कोच के भीतर हुआ था। इससे ट्रेन के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था या अन्य यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। रेलवे ने कहा कि किसी भी सामान्य यात्री कोच में इस प्रकार का आयोजन नहीं हुआ और न ही किसी यात्री की यात्रा प्रभावित हुई।अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया था। ट्रेन की सुरक्षा, परिचालन और यात्रियों की सुविधा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया। इसलिए इसे रेलवे नियमों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।रेलवे की सफाई के बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि सोशल मीडिया पर फैल रही कई बातें अधूरी जानकारी पर आधारित थीं। कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि चलती ट्रेन में बिना अनुमति धार्मिक आयोजन कराया गया, जबकि रेलवे ने स्पष्ट कर दिया कि यह एक निजी रूप से बुक किए गए सैलून कोच का मामला था और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप संपन्न हुई।हालांकि इस घटना ने एक नई बहस जरूर छेड़ दी है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े विशेष संसाधनों का निजी आयोजनों के लिए उपयोग किस सीमा तक किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी नियमों का पालन हो और सार्वजनिक व्यवस्था या अन्य यात्रियों पर कोई प्रभाव न पड़े, तो इस तरह की गतिविधियां निजी बुकिंग के दायरे में आती हैं।फिलहाल रेलवे की आधिकारिक सफाई के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। यानी वायरल वीडियो में दिख रहा रुद्राभिषेक किसी सामान्य ट्रेन के डिब्बे में नहीं, बल्कि नियमों के तहत बुक किए गए विशेष सैलून कोच में हुआ था, जिसके लिए संबंधित पार्टी ने विधिवत भुगतान भी किया था। रेलवे ने एक बार फिर दोहराया है कि इस पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा, संचालन और यात्रियों की सुविधा से कोई समझौता नहीं किया गया।
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