सिद्धार्थनगर महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति फेज-6 अभियान के तहत सिद्धार्थनगर में एक प्रेरणादायक पहल की गई। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बांसी की कक्षा आठ की छात्रा सुनैना को एक दिन के लिए सांकेतिक पुलिस अधीक्षक बनाया गया। इस दौरान सुनैना ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी की कुर्सी पर बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं और उनके निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।इस पहल का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी से परिचित कराना और पुलिस व्यवस्था के कामकाज की जानकारी देना है। सांकेतिक रूप से पुलिस अधीक्षक की भूमिका निभाने का अवसर मिलने से छात्राओं को यह संदेश भी दिया गया कि वे अपनी क्षमता और प्रतिभा के बल पर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
एसपी कार्यालय पहुंचकर सुनीं फरियादियों की शिकायतें
मिशन शक्ति फेज-6 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रा सुनैना को पुलिस अधीक्षक की सांकेतिक जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंचकर उन्होंने फरियादियों की समस्याएं सुनीं। शिकायतों को सुनने के बाद उन्होंने उनके गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए निर्देश दिए।कार्यक्रम के दौरान सुनैना ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया। आम तौर पर पुलिस कार्यालय में आने वाले फरियादी अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में शिकायतों को ध्यान से सुनना और नियमानुसार उनका समाधान सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।इस पहल के जरिए छात्रा को जनसमस्याओं को समझने और उनके समाधान की प्रक्रिया से परिचित कराने का प्रयास किया गया। साथ ही, यह संदेश भी दिया गया कि शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनके निस्तारण की दिशा में आवश्यक कदम उठाना सुशासन का अहम हिस्सा है।

मिशन शक्ति फेज-6 का उद्देश्य
उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलंबन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा संबंधी उपायों और सहायता के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी देने पर जोर दिया जाता है।इस तरह के कार्यक्रमों में छात्राओं की भागीदारी उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को समझने का अवसर देती है। जब बालिकाओं को जिम्मेदारी निभाने का अनुभव मिलता है, तो उनमें निर्णय लेने, अपनी बात रखने और नेतृत्व करने का आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिल सकती है।सिद्धार्थनगर में सुनैना को एक दिन की सांकेतिक एसपी बनाने की पहल भी इसी उद्देश्य से जुड़ी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि वे केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही न रहें, बल्कि शिक्षा और आत्मविश्वास के जरिए भविष्य में नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकती हैं।

बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने की पहल
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बांसी की कक्षा आठ में पढ़ने वाली सुनैना को पुलिस अधीक्षक की सांकेतिक भूमिका सौंपना छात्राओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक कदम है। इस तरह के अनुभव विद्यार्थियों को किताबी शिक्षा से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर देते हैं।पुलिस अधीक्षक की भूमिका निभाते हुए शिकायतें सुनना और उनके समाधान के लिए निर्देश देना अपने आप में जिम्मेदारी से जुड़ा अनुभव है। इससे छात्राओं को यह समझने में मदद मिलती है कि किसी भी पद पर काम करने के लिए लोगों की समस्याओं को सुनना, तथ्यों को समझना और उचित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेना कितना महत्वपूर्ण होता है।महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के अवसर देना भी आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और उनमें प्रशासनिक सेवाओं के प्रति रुचि पैदा करने में सहायक हो सकते हैं।
प्रभारी वार्डन संगीता देवी रहीं मौजूद
इस कार्यक्रम के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बांसी की प्रभारी वार्डन संगीता देवी मौजूद रहीं। उनकी उपस्थिति में छात्रा सुनैना ने सांकेतिक रूप से पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी निभाई और कार्यालय में आए फरियादियों की समस्याएं सुनीं।कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा तथा स्वावलंबन के संदेश को आगे बढ़ाया गया। मिशन शक्ति जैसे अभियानों की सार्थकता इसी में है कि बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और समाज में अपनी भागीदारी मजबूत करें।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश
सिद्धार्थनगर में आयोजित यह पहल बालिकाओं को नेतृत्व का अवसर देने और उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक दिन की सांकेतिक जिम्मेदारी भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन इसके जरिए छात्राओं को यह संदेश मिलता है कि उनकी प्रतिभा और क्षमताओं को पहचान देना जरूरी है।मिशन शक्ति फेज-6 के तहत इस तरह की गतिविधियां महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समान अवसरों की सोच को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं। छात्रा सुनैना का एक दिन के लिए सांकेतिक पुलिस अधीक्षक बनना इसी दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में सामने आया है।
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