अयोध्या के समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी की मिसाल: सरकारी स्कूल के जरूरतमंद बच्चों को बांटे निःशुल्क जूते, वृक्षारोपण कर शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

Editorial
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अयोध्या समाज की वास्तविक सेवा वही है, जो जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाए और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने का प्रयास करे। इसी सोच को साकार करते हुए अयोध्या के समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने बिहार के सिवान सदर स्थित राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय, धर्मकरियार में एक प्रेरणादायक सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में अध्ययनरत जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को निःशुल्क स्कूल जूतों का वितरण किया और विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।इस कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी एक सकारात्मक संदेश दिया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस आयोजन में शिक्षकों, स्थानीय नागरिकों और गणमान्य लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी

कार्यक्रम की शुरुआत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क स्कूल जूते वितरित करने से हुई। जैसे ही बच्चों को नए जूते मिले, उनके चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई देने लगा। कई बच्चे ऐसे थे, जिनके पास लंबे समय से उचित स्कूल जूते नहीं थे। ऐसे में यह सहायता उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं थी।विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि कई बार आर्थिक अभाव के कारण बच्चे बिना उचित यूनिफॉर्म या जूतों के स्कूल आने को मजबूर होते हैं। ऐसे प्रयास न केवल उनकी जरूरत पूरी करते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं।

‘शिक्षा के साथ मूलभूत सुविधाएं भी जरूरी’

समारोह को संबोधित करते हुए समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने कहा कि केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि यदि समाज के सक्षम लोग आगे आकर जरूरतमंद बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करें, तो इससे उनके भीतर पढ़ाई के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और सक्षम नागरिकों से अपील की कि वे भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

जूता वितरण कार्यक्रम के साथ-साथ विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी, विद्यालय परिवार और उपस्थित लोगों ने मिलकर पौधे लगाए तथा उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शिक्षा बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है, उसी प्रकार पेड़-पौधे पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करते हैं। यदि आज हम पर्यावरण की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।

विद्यालय परिवार ने जताया आभार

विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश श्रीवास्तव ने समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सामाजिक कार्य बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनते हैं।उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों की सहायता करने वाले लोग वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा हैं। विद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे।

गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश श्रीवास्तव, अतुल सिंह, अनिमेष, उज्ज्वल, अभिषेक, राजीव तिवारी सहित विद्यालय परिवार के सदस्य, स्थानीय नागरिक और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।सभी ने समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी की इस पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और कहा कि समाज में ऐसे प्रयासों की आज बेहद आवश्यकता है।

शिक्षा, सेवा और पर्यावरण का अनूठा संगम

कार्यक्रम केवल जूते बांटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायक संदेश भी बन गया। उपस्थित लोगों ने माना कि यदि समाज के लोग इसी तरह आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करें, तो शिक्षा का स्तर और सामाजिक समानता दोनों मजबूत होंगे।विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बच्चों के मनोबल को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब किसी बच्चे को समाज का सहयोग मिलता है, तो उसमें आगे बढ़ने की नई प्रेरणा पैदा होती है।

समाज के लिए बनी प्रेरणा

आज के समय में, जब अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी जैसे लोग यह साबित कर रहे हैं कि सेवा का भाव अभी भी जीवित है। जरूरतमंद बच्चों की मदद करना और साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना एक ऐसी पहल है, जो समाज को सकारात्मक दिशा देती है।सिवान सदर के राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय, धर्मकरियार में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बन गया। समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी की यह पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों के लिए मददगार साबित हुई, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि यदि हर सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार एक छोटा कदम उठाए, तो हजारों बच्चों का भविष्य संवर सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। शिक्षा, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का यह संगम वास्तव में समाज के लिए प्रेरणादायक मिसाल है।

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