तेहरान में होगा दुनिया का सबसे बड़ा जनाज़ा? लाखों की भीड़, कई देशों के प्रतिनिधि, भारत भी रहेगा शामिल

Editorial
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ईरान की राजधानी तेहरान इन दिनों पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बनी हुई है। वजह है ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार, जिसे दुनिया के सबसे बड़े जनाज़ों में से एक माना जा रहा है। अनुमान है कि इस अंतिम विदाई में लाखों लोग शामिल होंगे। यही कारण है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और कूटनीति का बड़ा मंच बनता जा रहा है।ईरान सरकार ने अंतिम संस्कार को कई दिनों तक चलने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम का स्वरूप दिया है। राजधानी तेहरान से शुरू होने वाली अंतिम यात्रा का समापन मशहद में होगा, जबकि क़ोम और इराक के पवित्र शिया शहरों में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है और लाखों लोगों के शामिल होने की तैयारी की गई है।

भारत की रहेगी अहम मौजूदगी

भारत इस महत्वपूर्ण मौके पर अपनी कूटनीतिक मौजूदगी दर्ज कराएगा। भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी तेहरान पहुंचेंगे। वहीं महबूबा मुफ़्ती भी ईरान के निमंत्रण पर इस कार्यक्रम में शामिल होंगी।हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत ने अपनी परंपरागत कूटनीतिक नीति के तहत उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है।

कौन-कौन से देश होंगे शामिल?

ईरान के इस राजकीय अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है। चीन ने अपना वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। रूस, पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के कई देशों के अधिकारी भी तेहरान पहुंच रहे हैं।दूसरी ओर अमेरिका और इज़रायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल नहीं होगा। कई यूरोपीय देशों ने भी अपने राष्ट्राध्यक्षों या प्रधानमंत्रियों के बजाय राजनयिक प्रतिनिधियों को भेजने का निर्णय लिया है।

सिर्फ़ जनाज़ा नहीं, शक्ति प्रदर्शन भी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक अंतिम विदाई तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान इसे राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक संदेश के रूप में भी दुनिया के सामने पेश करना चाहता है।हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, युद्ध और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह अंतिम संस्कार कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लाखों लोगों की मौजूदगी यह दिखाने की कोशिश होगी कि संकट की घड़ी में भी ईरान की राजनीतिक व्यवस्था और जनसमर्थन कायम है।

सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

इतनी बड़ी भीड़ और कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। ईरान ने अमेरिका और इज़रायल को किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से दूर रहने की चेतावनी भी दी है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और हवाई क्षेत्र पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।

क्या बदलेगी पश्चिम एशिया की राजनीति?

विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान में जुटने वाले विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली मुलाकातें आने वाले दिनों की कूटनीति पर असर डाल सकती हैं। पश्चिम एशिया की सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की रणनीतियों को लेकर कई अहम संदेश इस आयोजन से निकल सकते हैं।यही कारण है कि दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक इस अंतिम संस्कार को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं।

दुनिया की निगाहें अब तेहरान पर

अगले कुछ दिनों तक तेहरान वैश्विक सुर्खियों में बना रहेगा। एक ओर लाखों लोग अपने सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई देंगे, वहीं दूसरी ओर दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि इस मंच पर अपनी कूटनीतिक मौजूदगी दर्ज कराएंगे।ऐसे में यह जनाज़ा इतिहास के सबसे बड़े अंतिम संस्कारों में शामिल हो सकता है। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह होगी कि तेहरान से दुनिया को कौन-सा राजनीतिक संदेश मिलता है और क्या यह आयोजन पश्चिम एशिया की भविष्य की राजनीति की नई दिशा तय करेगा।

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