कानपुर कानपुर नगर निगम में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार की जांच के बीच मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में आग लगने की सूचना मिलते ही कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना नगर निगम के ऑडिट और संपत्ति विभाग के कार्यालय के आसपास हुई, जिसके बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई।सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। फिलहाल आग लगने की वजह और इससे हुए नुकसान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। नगर निगम या प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
भ्रष्टाचार की जांच के बीच लगी आग
नगर निगम मुख्यालय में आग की यह घटना ऐसे समय हुई है, जब शहर में नगर निगम से जुड़े कई कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि कूड़ा निस्तारण के ठेके, नाला सफाई और वार्ड विकास कार्यों से संबंधित मामलों में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच एसआईटी कर रही है।जांच के दौरान कई फर्मों पर कार्रवाई की जा चुकी है और कुछ फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात भी सामने आई है। वहीं, नगर निगम से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।इसी बीच ऑडिट और संपत्ति विभाग के आसपास आग लगने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि आग का संबंध भ्रष्टाचार की जांच या किसी दस्तावेज से है।

ऑडिट और संपत्ति विभाग के पास आग से बढ़ी चिंता
नगर निगम में ऑडिट और संपत्ति से जुड़े विभाग महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और प्रशासनिक दस्तावेजों से जुड़े होते हैं। ऐसे में इन कार्यालयों के आसपास आग लगने के बाद यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि घटना में किसी सरकारी रिकॉर्ड, फाइल या अन्य दस्तावेज को नुकसान पहुंचा है या नहीं।फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि आग कार्यालय के किस हिस्से से शुरू हुई थी और आग लगने के समय वहां कौन-कौन से रिकॉर्ड या सामान मौजूद थे। दमकल विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया, लेकिन घटना को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।
क्या जांच से जुड़े दस्तावेज प्रभावित हुए?
आग की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि कहीं जांच से संबंधित कोई रिकॉर्ड तो प्रभावित नहीं हुआ। हालांकि, यह केवल आशंका है और इसकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी या प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।यह पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आग से प्रभावित स्थान का निरीक्षण करना होगा। साथ ही यह भी सामने आना जरूरी है कि आग किस कारण से लगी, कितने क्षेत्र में फैली और क्या-क्या सामान या दस्तावेज इसकी चपेट में आए।जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, आग को भ्रष्टाचार की जांच से जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर पाया काबू
नगर निगम मुख्यालय में आग लगने की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने आग को नियंत्रित करने का काम शुरू किया और स्थिति को संभाला।समय रहते आग पर काबू पा लिए जाने से इसके और अधिक फैलने का खतरा टल गया। घटना के बाद नगर निगम परिसर में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी हलचल देखने को मिली।अब दमकल विभाग की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आग की शुरुआत कैसे हुई। शॉर्ट सर्किट समेत अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा सकती है।
नगर निगम की जांच पर फिर उठे सवाल
कानपुर नगर निगम पहले से ही कई विकास और सफाई कार्यों को लेकर जांच के दायरे में है। ऐसे में मुख्यालय में आग की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।नगर निगम में होने वाले ठेकों और विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों का महत्व काफी अधिक होता है। यदि किसी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचता है तो संबंधित जांच की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि आग से प्रभावित क्षेत्र और वहां रखे दस्तावेजों का जल्द से जल्द रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि आग लगने के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी और इससे कितना नुकसान हुआ। इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि क्या किसी महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा है।प्रशासन की ओर से यदि आग के कारण, नुकसान और प्रभावित दस्तावेजों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आती है तो तस्वीर और साफ होगी। वहीं, यदि किसी दस्तावेज या रिकॉर्ड के प्रभावित होने की पुष्टि होती है तो यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।कानपुर नगर निगम मुख्यालय में भ्रष्टाचार जांच के बीच लगी आग ने कई सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन फिलहाल आग को एसआईटी जांच से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है। अब दमकल और प्रशासनिक जांच से ही पता चलेगा कि आग कैसे लगी और इस घटना में कितना नुकसान हुआ।
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