
मेरठ के खरखौदा में हुआ तुषार त्यागी हत्याकांड सिर्फ एक मामूली जमीन विवाद नहीं, बल्कि साक्ष्यों, फरेब, और रोंगटे खड़े कर देने वाली पारिवारिक साजिश की ऐसी सनसनीखेज दास्तान है जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक को हिलाकर रख दिया है। हापुड़ के गांव दोयमी निवासी 24 वर्षीय तुषार त्यागी की मौत के बाद जो सच सामने आ रहा है, वह किसी रूह कंपा देने वाली फिल्मी थ्रिलर से भी ज्यादा पेचीदा और भयानक है। इस हत्याकांड में कत्ल का आरोपी कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि खून का सगा रिश्ता यानी उसका अपना पिता सुंदर त्यागी है, जिसके काले अतीत और दोहरे चेहरे ने इस पूरी वारदात को खौफनाक मोड़ दे दिया है। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह सुंदर त्यागी का बदला हुआ वजूद है। पुलिस को पता चला है कि इस पूर्व हिस्ट्रीशीटर पिता ने करीब दो दशक पहले ही अपना गांव और जिला छोड़ दिया था। वह देहरादून भाग गया था और वहां अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह दफन करके ‘विकास सुमन’ नाम के एक नए इंसान के रूप में जी रहा था। देहरादून की चकाचौंध में वह प्रॉपर्टी डीलिंग का बड़ा कारोबार खड़ा कर चुका था। हैरानी की बात यह है कि इस खौफनाक कत्ल में इस्तेमाल की गई आलीशान थार गाड़ी और मौत का सामान बनी लाइसेंसी पिस्टल भी इसी फर्जी नाम यानी विकास सुमन के नाम पर ही रजिस्टर्ड हैं। पुलिस अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या सुंदर ने पहचान बदलने के लिए सारे सरकारी दस्तावेज फर्जी तैयार करवाए थे या फिर इस खेल में विकास सुमन नाम का कोई और किरदार भी परदे के पीछे छिपा हुआ है।

इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री की शुरुआत सोमवार की उस काली रात से होती है, जो तुषार त्यागी के लिए आखिरी रात साबित हुई। तुषार की पत्नी शिखा के मुताबिक, सोमवार रात ठीक आठ बजे तुषार के मोबाइल पर किसी का फोन आया, जिसने उसे खाना लेकर किसी जगह पर बुलाया। तुषार घर से निकला, लेकिन रात नौ बजे उसका एक आखिरी और डरावना फोन आया, जिसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। तुषार ने बेहद घबराए हुए लहजे में फोन पर कहा कि कुछ लोग उसे किसी सुनसान और एकांत जगह पर ले जा रहे हैं और वे उसकी हत्या कर सकते हैं। इसके ठीक बाद उसका मोबाइल हमेशा के लिए बंद हो गया। अनहोनी की आशंका से घबराए परिवार ने पुलिस को सूचित किया। रात ठीक बारह बजे तुषार की बहन मोना त्यागी ने पुलिस को फोन कर सीधे अपने पिता सुंदर त्यागी उर्फ राजीव पर भाई की हत्या करने का शक जताया। पुलिस ने जब तलाश शुरू की, तो मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर कैली अंडरपास की सर्विस रोड पर तुषार की ही स्कॉर्पियो गाड़ी खड़ी मिली, जिसके भीतर तुषार का खून से लथपथ शव बरामद हुआ। इस सनसनीखेज बरामदगी के बाद पुलिस हरकत में आई और मंगलवार देर रात मुख्य आरोपी पिता सुंदर त्यागी और उसके देहरादून निवासी साथी अमित वेदवान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पूछताछ के दौरान कातिल पिता ने जो कहानी पुलिस को बताई, वह जमीन के लालच में मरे जा रहे इंसानी रिश्तों को बेनकाब करती है। सुंदर ने बताया कि गांव में उसके पास कुल 36 बीघा कृषि भूमि है, जिसका बंटवारा उलझा हुआ था। इस कुल जमीन में से 15 बीघा जमीन सुंदर की पत्नी के नाम है, छह बीघा खुद सुंदर के नाम है, और बाकी बची 15 बीघा जमीन सुंदर की मां यानी मृतक तुषार की दादी के नाम पर दर्ज थी। सुंदर का आरोप था कि उसका 24 साल का बेटा तुषार अपनी दादी के हिस्से वाली इसी 15 बीघा कीमती जमीन को बेचने की फिराक में लगा हुआ था। सुंदर इस जमीन को किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देना चाहता था और इसी पैतृक जमीन के टकराव में उसने अपने ही सगे बेटे को रास्ते से हटाने का आत्मघाती फैसला कर लिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि असली धमाका तब हुआ जब बुधवार को मृतक की पत्नी शिखा और बहन मोना अपने रिश्तेदारों के साथ खरखौदा थाने पहुंचीं। वहां जब पुलिस ने उनका सामना बंद हवालात में बैठे सुंदर त्यागी से कराया, तो बेटियों ने पुलिस के इस पूरे खुलासे की धज्जियां उड़ा कर रख दीं और पुलिस की कहानी पर एक बहुत बड़ा और तीखा सवालिया निशान लगा दिया। रोती और बिलखती बहू-बेटी ने पुलिस के सामने चिल्लाते हुए पूछा कि जो बाप खुद बैसाखी पर है, वो कत्ल कैसे कर सकता है? परिजनों का साफ कहना है कि सुंदर त्यागी लंबे समय से किडनी और लिवर की गंभीर और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहा है। उसके पेट में भयंकर पानी भरा हुआ है और उसकी हालत इतनी नाजुक है कि उसे दिन में कई बार इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। वह खुद अपने पैरों पर ठीक से खड़े होने या चलने-फिरने में भी पूरी तरह असमर्थ है। ऐसे में एक लाचार और गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग अकेले या एक साथी के दम पर इतने तगड़े जवान बेटे की हत्या को कैसे अंजाम दे सकता है? परिजनों ने सीधा आरोप लगाया कि पुलिस ने सुंदर त्यागी को जबरन मोहरा बनाकर असली गुनहगारों को बचा लिया है। उनके मुताबिक, इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात का असली मास्टरमाइंड राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल का हापुड़ जिलाध्यक्ष अरविंद उर्फ बिट्टू त्यागी और तरुण त्यागी हैं, जिन्होंने परदे के पीछे रहकर इस पूरी खूनी साजिश का ताना-बाना बुना था।
इस मामले में देहरादून के उस सीक्रेट का भी पर्दाफाश हुआ है जो सुंदर त्यागी वहां छुपाकर जी रहा था। मृतक की बहन मोना ने पुलिस को बताया कि उनके पिता सुंदर त्यागी देहरादून में किसी मुस्लिम महिला के साथ रह रहे थे। वहीं, इस मामले में गिरफ्तार किया गया दूसरा आरोपी अमित वेदवान एक बेहद शातिर मोहरा था। अमित अक्सर व्हाट्सएप कॉल्स के जरिए तुषार की बात देहरादून में बैठे उसके पिता से करवाता था। इतना ही नहीं, अमित कई बार तुषार को अपने साथ देहरादून भी ले गया था, जहां उसने सुंदर त्यागी की कई करोड़ रुपये की बेनामी और आलीशान संपत्तियां तुषार को दिखाई थीं। तुषार और उसका पूरा परिवार कई बार देहरादून अपने पिता से मिलने भी गया था, लेकिन वहां सुंदर त्यागी की चालाकी की हद यह थी कि वह दुनिया और समाज के सामने अपने सगे बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को अपना परिवार न बताकर, अपने ‘भाई का परिवार’ कहकर मिलवाता था ताकि उसकी असली पहचान का राज कभी न खुले। थाने के गलियारों में गूंजती पत्नी शिखा की चीखें पुलिसिया दावों पर गहरे सवाल छोड़ गई हैं। शिखा का रो-रोकर बुरा हाल है और उसका कहना है कि जब इस प्रॉपर्टी के खूनी विवाद में उसके पति ही सुरक्षित नहीं रह पाए, तो अब उनके जाने के बाद उसके दो मासूम बच्चों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? फिलहाल इस मामले में कानून की कार्रवाई जारी है। एसपी देहात अभिजीत कुमार के मुताबिक, वारदात में इस्तेमाल की गई थार गाड़ी को पुलिस ने बरामद कर लिया है, लेकिन कत्ल में इस्तेमाल की गई वो लाइसेंसी पिस्टल अभी तक बरामद नहीं हो सकी है, जो इस केस की सबसे अहम कड़ी है। पुलिस को पता चला है कि तुषार की बेरहमी से हत्या करने के बाद सुंदर और अमित वापस देहरादून भाग गए थे और सुंदर ने अपनी वो पिस्टल वहां किसी दुकान पर जमा कर दी थी, जिसे रिकवर करने के लिए पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। बुधवार को पुलिस ने आरोपियों को घटना स्थल पर ले जाकर बकायदा क्राइम सीन भी रीक्रिएट किया है ताकि कत्ल की कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस का कहना है कि विकास सुमन के नाम की असलियत और फरार चल रहे नामजद आरोपी बिट्टू त्यागी और तरुण त्यागी की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे हत्याकांड का वो सच सामने आ पाएगा, जो अभी भी रहस्य के घेरे में छुपा हुआ है।
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