राम मंदिर दान विवाद पर वकीलों का महाविस्फोट! FIR नहीं हुई तो राम जन्मभूमि थाने का होगा घेराव

Editorial
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रिपोर्ट :धर्मेंद्र सिंह 

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर अयोध्या में अब विरोध का स्वर और तेज हो गया है। अधिवक्ता संघ ने इस मुद्दे पर खुला मोर्चा खोलते हुए सैकड़ों वकीलों के साथ कचहरी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां, गगनभेदी नारे और प्रशासन के खिलाफ तीखे तेवर के बीच अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो आंदोलन सड़क से लेकर थाना राम जन्मभूमि तक पहुंचेगा।प्रदर्शन का नेतृत्व अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने किया। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे अधिवक्ताओं की शिकायत को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि पुलिस ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो अधिवक्ता संघ थाना राम जन्मभूमि का घेराव करेगा और आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

कचहरी परिसर में गूंजे नारे, प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा

कचहरी परिसर सोमवार को विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए और “भ्रष्टाचार बंद करो”, “दान का हिसाब दो” तथा “दोषियों पर मुकदमा दर्ज करो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन किया।अधिवक्ताओं का कहना था कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि दान राशि के दुरुपयोग या गबन जैसे आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई लोगों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर FIR की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता संघ ने अपनी प्रमुख मांग दोहराते हुए कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।अधिवक्ताओं का कहना है कि इस संबंध में सभी आवश्यक तथ्यों के साथ पुलिस को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई विधिक कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है।

15 दिन पहले दी थी तहरीर, अब तक नहीं दर्ज हुआ मुकदमा

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि लगभग 15 दिन पहले राम जन्मभूमि थाने में लिखित तहरीर दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया।

उन्होंने कहा कि यदि आम नागरिक की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है तो इतने गंभीर मामले में पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ विशेष व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

‘आस्था के नाम पर किसी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता’

प्रदर्शन के दौरान कई अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी धार्मिक भावना के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर है।उनका कहना था कि राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसलिए मंदिर से जुड़े किसी भी वित्तीय विवाद की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि किसी पर आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो वह भी स्पष्ट होना चाहिए।

आठ आरोपियों की पैरवी से पहले ही कर चुका है इनकार

इस पूरे विवाद में अधिवक्ता संघ पहले भी सख्त रुख अपना चुका है। संघ ने इससे पहले दान गबन मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की पैरवी करने से इनकार कर दिया था।अधिवक्ताओं का कहना था कि यह उनका नैतिक निर्णय है। उनका मानना है कि जिस मामले में करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हों, उसमें पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।अब अधिवक्ता संघ ने आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

प्रशासन को दी खुली चेतावनी

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने साफ कहा कि यदि जल्द एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र होगा।उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रदर्शन किया गया है। इसके बाद थाना राम जन्मभूमि का घेराव किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से भी दूरी बना सकते हैं और व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।उनका कहना था कि यह केवल वकीलों का मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि शिकायत पर अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई या जांच किस स्तर पर है।अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि पुलिस कार्रवाई करती है तो विवाद नया मोड़ ले सकता है, जबकि कार्रवाई में और देरी होने पर अधिवक्ता संघ के आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

आगे क्या होगा?

राम मंदिर दान गबन विवाद अब केवल कानूनी नहीं बल्कि सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। एक ओर अधिवक्ता संघ लगातार कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस शिकायत पर क्या निर्णय लेती है और क्या अधिवक्ता संघ अपनी घोषित रणनीति के तहत राम जन्मभूमि थाने का घेराव करता है।

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