कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक बार फिर पुलिस पर हमले की सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने वर्ष 2020 के चर्चित बिकरू कांड की यादें ताजा कर दी हैं। चौबेपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव में जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया। पुलिस की पीआरवी पर जमकर पथराव किया गया, वाहन के शीशे तोड़ दिए गए और दो सिपाहियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। आरोप है कि हमलावरों ने सिपाहियों की वर्दी फाड़ दी और चप्पलों व लात-घूंसों से मारपीट की। इस दुस्साहसिक घटना में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया है। गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
जमीन विवाद बना हिंसा की वजह
पुलिस के अनुसार, चौबेपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव में वीरेंद्र और राहुल पक्ष के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। शुक्रवार शाम दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद बढ़ने लगा। सूचना मिलने पर बिठूर क्षेत्र की पीआरवी-9156 में तैनात सिपाही अरविंद और अनूप मौके पर पहुंचे।दोनों पुलिसकर्मियों ने पहले दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया और माहौल शांत कराने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही पुलिस विवादित पक्षों को थाने ले जाने लगी, माहौल अचानक हिंसक हो गया।
भीड़ ने पुलिस को घेरा, शुरू हुआ पथराव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, मौके पर जमा हो गए। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पुलिस टीम को चारों ओर से घेर लिया।इसके बाद पुलिस पर ईंट-पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। लगातार हो रहे पथराव में पीआरवी वाहन के शीशे चकनाचूर हो गए और दोनों सिपाही घायल हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा।
दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, वर्दी फाड़ी
पुलिस का आरोप है कि भीड़ ने सिर्फ पथराव ही नहीं किया, बल्कि दोनों सिपाहियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उनके साथ धक्कामुक्की की गई, गाली-गलौज की गई और उनकी वर्दी तक फाड़ दी गई।मारपीट के दौरान सिपाहियों को लात-घूंसों और चप्पलों से भी पीटा गया। इस घटना का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचा, तब बची जान
घटना की सूचना मिलते ही चौबेपुर थाने से अतिरिक्त पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा। अतिरिक्त फोर्स ने किसी तरह घायल पुलिसकर्मियों को भीड़ के चंगुल से बाहर निकाला और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा।पुलिस के पहुंचने की सूचना मिलते ही कई आरोपी अपने घरों में ताला लगाकर फरार हो गए। पूरे गांव में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
छह लोग हिरासत में, गंभीर धाराओं में मुकदमा
एसीपी बिल्हौर अंकित कुमार ने बताया कि पुलिसकर्मी अनूप की तहरीर पर वीरेंद्र, उसकी पत्नी, बेटी, बेटे नरेंद्र सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, पुलिस पर हमला, हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस ने अब तक छह लोगों को हिरासत में लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
फिर ताजा हुई बिकरू कांड की याद
इस घटना ने वर्ष 2020 के बिकरू कांड की भयावह यादें फिर ताजा कर दी हैं। 2 जुलाई 2020 की रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया था।उस हमले में तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा, थाना प्रभारी महेशचंद्र यादव समेत आठ पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पूरे देश को झकझोर देने वाली उस घटना के बाद पुलिस ने बड़ा अभियान चलाकर विकास दुबे गैंग का सफाया किया था।अब एक बार फिर चौबेपुर क्षेत्र में पुलिस पर हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल के वर्षों में पुलिस पर बढ़े हमले
कानपुर में पुलिस पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
- 17 सितंबर 2025 को नरवल के शीशपुर गांव में नशे में धुत लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था।
- 16 मार्च 2026 को घाटमपुर के स्योंदी ललईपुर गांव में जमीन विवाद सुलझाने गई पुलिस टीम पर हमला हुआ।
- 11 अप्रैल 2026 को नरवल के ग्राम पाली में पुलिसकर्मियों की पिटाई की गई और चौकी में आग लगाने की कोशिश की गई।
- 25 अप्रैल 2026 को बनियापुरवा में नौटंकी कार्यक्रम के दौरान पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें एक पीएसी जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।
- 21 अप्रैल 2026 को घंटाघर चौराहे पर चालान काटने को लेकर टेंपो चालक और उसके साथियों ने पुलिस बूथ पर हमला कर दिया।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पुलिस की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इलाके में तनाव, पुलिस अलर्ट पर
फिलहाल भवानीपुर गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने पहुंची पुलिस यदि खुद हिंसक भीड़ का शिकार बनने लगे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। अब सबकी निगाहें पुलिस की आगे की कार्रवाई और दोषियों पर होने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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