लखनऊ उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि आयोग के पद 12 जून 2024 से रिक्त हैं और करीब डेढ़ साल से मामला लंबित होने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दे दी।मामले की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर 2026 को होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी अगली सुनवाई में सामने रखी जाए।
- 12 जून 2024 से खाली पड़े हैं आयोग के पद
- ‘डेढ़ साल से मामला लंबित, सरकार ने नहीं उठाया ठोस कदम’
- सरकार ने लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार की बात कही
- सरकार के आश्वासन से कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नहीं
- जनवरी से मिले 12 नए आवेदन
- अगली सुनवाई 21 सितंबर को
- अल्पसंख्यक आयोग की नियुक्तियां क्यों महत्वपूर्ण?
- अब सरकार के सामने चुनौती

12 जून 2024 से खाली पड़े हैं आयोग के पद
अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्तियों का मामला लंबे समय से लंबित है। अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि आयोग के रिक्त पद 12 जून 2024 से खाली पड़े हैं। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा नहीं किया जा सका।लंबे समय तक पद खाली रहने के कारण आयोग के कामकाज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार से यह जानना चाहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की वजह क्या है।
‘डेढ़ साल से मामला लंबित, सरकार ने नहीं उठाया ठोस कदम’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। अदालत की ओर से यह सवाल उठाया गया कि जब पद लंबे समय से खाली हैं तो उन्हें भरने के लिए समय पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि मामला करीब डेढ़ साल से लंबित है। ऐसे में केवल प्रक्रिया चलने की जानकारी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। सरकार को नियुक्ति के मामले में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई गई।अदालत की नाराजगी के बाद सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई।
सरकार ने लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार की बात कही
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्ति के लिए प्राप्त लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार किया जाएगा। सरकार ने अदालत को प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।सुनवाई के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि जनवरी 2026 से अब तक 12 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार का कहना है कि पुराने लंबित आवेदनों के साथ नए प्राप्त आवेदनों पर भी विचार किया जाएगा।इससे नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, सरकार के इस आश्वासन से अदालत पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई।
सरकार के आश्वासन से कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नहीं
अदालत ने सरकार के रुख को सुनने के बाद चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत तो दी, लेकिन यह भी संकेत दिया कि केवल आश्वासन से मामला खत्म नहीं होगा। कोर्ट यह देखना चाहता है कि सरकार नियुक्ति प्रक्रिया को वास्तव में किस तरह आगे बढ़ाती है।अदालत के रुख से स्पष्ट है कि लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर अब सरकार पर प्रक्रिया जल्द पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।अगली सुनवाई में सरकार को यह बताना पड़ सकता है कि चार सप्ताह की अवधि में नियुक्तियों को लेकर क्या प्रगति हुई और लंबित आवेदनों पर क्या निर्णय लिया गया।
जनवरी से मिले 12 नए आवेदन
सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 से अब तक आयोग में नियुक्ति के लिए 12 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे पहले से लंबित आवेदनों के साथ इन नए आवेदनों पर भी विचार किया जाना है।सरकार की ओर से सभी आवेदनों पर एक साथ विचार करने की बात कही गई है। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी पात्र आवेदकों पर एक समान तरीके से विचार किए जाने की उम्मीद है।
हालांकि नियुक्ति की अंतिम प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अगली सुनवाई 21 सितंबर को
हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।अब सरकार को अगली सुनवाई तक नियुक्ति प्रक्रिया में हुई प्रगति की जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी। अदालत यह भी देख सकती है कि रिक्त पदों को भरने की दिशा में सरकार ने अपने आश्वासन के मुताबिक कितना काम किया।
अल्पसंख्यक आयोग की नियुक्तियां क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का काम अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और शिकायतों से संबंधित मामलों में भूमिका निभाना है। ऐसे में आयोग में पद लंबे समय तक खाली रहने का मुद्दा प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।रिक्त पदों पर समय से नियुक्तियां होने से आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूती मिल सकती है और उससे जुड़े मामलों के निस्तारण में भी मदद मिल सकती है। यही वजह है कि नियुक्तियों में देरी का मामला अदालत की निगरानी तक पहुंचा है।
अब सरकार के सामने चुनौती
हाईकोर्ट से मिली चार सप्ताह की मोहलत सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार को अब लंबित और नए आवेदनों पर एक साथ विचार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।अदालत के सामने अगली सुनवाई में केवल प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी देना पर्याप्त होगा या नहीं, यह अदालत के रुख पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द पूरा करना है।उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में 12 जून 2024 से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति में देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाराजगी जताई है। करीब डेढ़ साल से लंबित मामले में सरकार ने अब लंबित आवेदनों के साथ जनवरी 2026 से मिले 12 नए आवेदनों पर भी एक साथ विचार करने का आश्वासन दिया है।हालांकि कोर्ट सरकार की दलीलों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ और उसे चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दी है। अब मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। इस सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार ने कितना ठोस कदम उठाया है।
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