रिपोर्ट :मो अरशद
मुरादाबाद में IGRS शिकायतों के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली यानी IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों, उनके निस्तारण और शिकायतकर्ताओं के फीडबैक की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जनपद में शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि का प्रतिशत मात्र 61 फीसदी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि IGRS शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं होना चाहिए। अधिकारियों को शिकायतों का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना होगा, ताकि शिकायतकर्ता को मौके पर राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि शिकायत का निस्तारण तभी प्रभावी माना जाएगा, जब संबंधित व्यक्ति समस्या के समाधान से संतुष्ट हो।
61 प्रतिशत संतुष्टि पर जिलाधिकारी ने अपनाया सख्त रुख
बैठक में IGRS शिकायतों से जुड़े फीडबैक की समीक्षा के दौरान जब संतुष्टि प्रतिशत 61% सामने आया तो जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों का निस्तारण निर्धारित समय-सीमा के भीतर और पूरी गंभीरता के साथ किया जाए।उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण सिर्फ रिपोर्ट भेजने तक सीमित नहीं होना चाहिए। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जिस समस्या को लेकर शिकायत की गई है, उसका वास्तविक समाधान हुआ है या नहीं।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए।

निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से करें बात
जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी IGRS शिकायत का निस्तारण करने के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से संवाद किया जाए। अधिकारी शिकायतकर्ता से बात कर उसे बताया जाए कि उसकी समस्या के समाधान के लिए क्या कार्रवाई की गई है।उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता से प्राप्त फीडबैक को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अगर किसी शिकायत पर असंतुष्ट फीडबैक मिलता है, तो अधिकारी उसके कारणों की पड़ताल करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें।प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान करना होना चाहिए।
असंतुष्ट फीडबैक की होगी समीक्षा
बैठक में जिलाधिकारी ने असंतुष्ट फीडबैक को लेकर भी अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस शिकायतकर्ता ने निस्तारण के बाद भी असंतोष जताया है, उसकी शिकायत की दोबारा समीक्षा की जाए।अधिकारी यह पता लगाएं कि शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में दूर हुई है या निस्तारण केवल रिकॉर्ड में किया गया है। यदि कहीं लापरवाही या अधूरा समाधान पाया जाता है तो उसमें सुधार किया जाए।इस दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि शिकायतकर्ता को समस्या के समाधान की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए, जिससे उसे यह स्पष्ट हो सके कि प्रशासन ने उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की है।

चकबंदी और राजस्व विभाग पर विशेष निगरानी
IGRS शिकायतों के निस्तारण को लेकर चकबंदी और राजस्व विभाग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण के दौरान दिए गए आश्वासनों को हर हाल में पूरा किया जाए।भूमि, राजस्व और चकबंदी से संबंधित शिकायतें अक्सर सीधे आम लोगों की जमीन और अधिकारों से जुड़ी होती हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही से विवाद बढ़ सकता है। इसलिए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को अधिक सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ काम करने को कहा।उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि शिकायतों पर की गई कार्रवाई स्पष्ट और तथ्यात्मक हो।
‘आश्वासन रजिस्टर’ और ‘मांग रजिस्टर’ बनाने के आदेश
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को IGRS से संबंधित ‘आश्वासन रजिस्टर’ और ‘मांग रजिस्टर’ अनिवार्य रूप से तैयार करने के निर्देश दिए।इन रजिस्टरों के माध्यम से शिकायतों से जुड़े आश्वासनों और लोगों की मांगों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। इससे अधिकारियों को लंबित मामलों की निगरानी करने और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से इन रजिस्टरों की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी शिकायतकर्ता को दिए गए आश्वासन लंबित न रहें।
समय-सीमा में शिकायतों का निस्तारण जरूरी
IGRS पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य किया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि अधिकारी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर देखें और समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण समाधान उपलब्ध कराएं। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की प्राथमिकता—शिकायतकर्ता की संतुष्टि
बैठक में जिलाधिकारी ने दोहराया कि IGRS शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण और शिकायतकर्ता की संतुष्टि प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनका प्रभावी समाधान करना जरूरी है।IGRS पोर्टल आम लोगों को अपनी शिकायत प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए शिकायतों का वास्तविक समाधान जरूरी है।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) मृणाली अविनाश जोशी, अपर जिलाधिकारी नगर (ADM City) अंकुर श्रीवास्तव समेत विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।मुरादाबाद प्रशासन की इस समीक्षा बैठक के बाद अब विभागीय अधिकारियों पर IGRS शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता सुधारने और असंतुष्ट फीडबैक को कम करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद आने वाले दिनों में शिकायतों के निस्तारण और शिकायतकर्ता संतुष्टि के स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
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