PM Modi के 25 साल पूरे, विकसित भारत का संकल्प और ‘वी विल डू इट’ का नारा

Editorial
8 Min Read

“रास्ते बदले, जिम्मेदारियां बढ़ीं…
वक्त गुजरता गया, लेकिन संकल्प नहीं बदला।
25 साल की सेवा के इस पड़ाव पर
एक बार फिर आवाज उठी—
भारत को विकसित बनाना है… और हम करके रहेंगे।”

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन में 25 साल की सेवा पूरी होने के मौके पर देशवासियों का आभार जताया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी लंबी यात्रा को जनता के आशीर्वाद और सहयोग से जुड़ा बताया। साथ ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए ‘वी विल डू इट’ यानी ‘हम करके रहेंगे’ का संदेश दिया।

25 साल की यात्रा पर देशवासियों को नमन

नई दिल्ली में आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके जीवन में ऐसा अवसर भी आएगा, जब वह देश के नागरिकों के सामने इस तरह धन्यवाद व्यक्त कर सकेंगे।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में यह लंबा सफर जनता के विश्वास और आशीर्वाद के कारण संभव हुआ है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वह जनता के इस भरोसे के लिए शीश झुकाकर नमन करते हैं।प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन का यह पड़ाव 7 अक्टूबर 2001 से जुड़ा है, जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 2026 में इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर उन्होंने अपने अनुभवों और आने वाले वर्षों के संकल्पों को सामने रखा।

PM Modi के 25 साल पूरे
PM Modi के 25 साल पूरे

‘वी विल डू इट’ के साथ विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर केवल बीते वर्षों की चर्चा नहीं की, बल्कि देश के भविष्य का रोडमैप भी सामने रखा। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया।उन्होंने कहा कि भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ना है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है।इसी संकल्प के साथ प्रधानमंत्री ने कहा—‘वी विल डू इट’, यानी हम करके रहेंगे।प्रधानमंत्री का यह संदेश उनके उस व्यापक विकसित भारत विजन से जुड़ा है, जिसमें 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया जाता रहा है।

PM Modi के 25 साल पूरे
PM Modi के 25 साल पूरे

‘जनता मेरे लिए ईश्वर का रूप’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की जनता को अपनी यात्रा का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि जनता उनके लिए ईश्वर का रूप है और देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। इसलिए देश के प्रति उनका दायित्व भी उतना ही बड़ा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों का अनुभव उनके लिए बहुत बड़ी पूंजी है। उन्होंने इसे केवल अपनी व्यक्तिगत पूंजी न बताते हुए देश की पूंजी बताया और कहा कि इसका असली अधिकारी देश का नागरिक है।उन्होंने इस दौरान भाजपा, एनडीए, मंत्रियों, नेताओं और उन सभी नागरिकों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा में सहयोग दिया।

PM Modi के 25 साल पूरे
PM Modi के 25 साल पूरे

सेवा ज्योति यात्रा को दिखाई हरी झंडी

विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करने से पहले प्रधानमंत्री ने सेवा ज्योति यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने यात्रा में शामिल नागरिकों का भी अभिनंदन किया।प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र और संविधान के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चुनावों के दौरान जनता ने उन्हें सेवा का अवसर दिया और यह उनके लिए जिम्मेदारी का विषय है।

 

‘आज भी खुद को विद्यार्थी मानता हूं’

प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि सीखने की ललक उनके जीवन का हिस्सा रही है।उन्होंने वडनगर के स्कूल के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि वह कक्षा में सबसे पहले पहुंचने वाले विद्यार्थियों में रहते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी वह स्वयं को एक विद्यार्थी मानते हैं और हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं।उन्होंने कहा कि 25 साल की सार्वजनिक सेवा के दौरान उनके जीवन में आया कोई भी अनुभव व्यर्थ नहीं गया। सफलता ने उन्हें विनम्रता सिखाई, जबकि मुश्किलों ने दोबारा खड़े होने की प्रेरणा दी। शुभचिंतकों ने आगे बढ़ने का हौसला दिया और आलोचनाओं ने आत्ममंथन का अवसर दिया।

आदिवासी क्षेत्रों में सेवा का किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर को याद करते हुए आदिवासी समुदायों के बीच किए गए काम का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि करीब 25 साल पहले तक उनके राजनीतिक जीवन में मुख्य रूप से एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में काम करने का अनुभव था। उन्होंने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में समय बिताया और आदिवासी समुदायों के बीच सेवा कार्य किया।उस समय तक उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावी राजनीति में आगे बढ़ना उनका व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं था। उनके अनुसार, बचपन से मिले संस्कारों ने उन्हें यह सिखाया कि जीवन किसी निजी महत्वाकांक्षा के बजाय किसी बड़े उद्देश्य के लिए जीना चाहिए।

‘कर्म ही मेरा धर्म’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे वह निभाते चले गए। उन्होंने अपने जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि कर्म ही सब कुछ है और कर्म ही उनका धर्म है।उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल पुरानी यादों को दोहराने का अवसर नहीं है। यह अपने संकल्पों को नई ऊर्जा देने और भविष्य के लिए नए इरादे के साथ आगे बढ़ने का समय है।

25 साल पूरे, आगे का लक्ष्य 2047

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की सार्वजनिक सेवा यात्रा के इस पड़ाव पर उनके संबोधन का केंद्र अतीत से ज्यादा भविष्य रहा। उन्होंने जनता के विश्वास के लिए आभार जताया और 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराया।संदेश यही रहा कि 25 साल का सफर एक पड़ाव जरूर है, लेकिन लक्ष्य अभी लंबा है।

“सफर की उम्र 25 साल हुई है,
लेकिन संकल्प की उम्र नहीं…
मंजिल अभी बाकी है,
और प्रधानमंत्री का संदेश है—
‘वी विल डू इट’… हम करके रहेंगे।”

Read on:http://यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा ने नहीं उतारा तीसरा उम्मीदवार, बदला चुनावी गणित

Advertisement visit our officehttp://:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment