लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में होने वाली भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आगामी चुनाव का एजेंडा तय करने पर मंथन होगा। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में संगठन की मजबूती, सरकार के कामकाज, जनकल्याणकारी योजनाओं और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक का उद्घाटन अमित शाह करेंगे, जबकि समापन सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना है। इसके लिए संगठनात्मक तैयारियों का आकलन करने के साथ उन क्षेत्रों और बूथों पर विशेष ध्यान देने की रणनीति बनाई जाएगी, जहां पार्टी को अपनी स्थिति और मजबूत करने की जरूरत है। बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को भी प्रमुखता से रखा जाएगा।
- अमित शाह का लखनऊ दौरा: करीब चार घंटे रहेंगे राजधानी में
- तीन सत्रों में होगी बैठक, चुनावी एजेंडे पर रहेगा जोर
- राजनीतिक प्रस्ताव में सरकार की उपलब्धियों को मिलेगी जगह
- पंकज चौधरी की अध्यक्षता में तैयारियों को अंतिम रूप
- जिला स्तर तक के पदाधिकारी होंगे शामिल
- देर रात विनोद तावड़े और पंकज चौधरी ने किया निरीक्षण
- मिशन 2027 के लिए संगठन को सक्रिय करने की तैयारी
अमित शाह का लखनऊ दौरा: करीब चार घंटे रहेंगे राजधानी में
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को करीब चार घंटे के लिए लखनऊ पहुंचेंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, उनका सुबह 11 बजे चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचने का कार्यक्रम है। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक उनका स्वागत करेंगे।इसके बाद अमित शाह डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पहुंचेंगे, जहां भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होकर उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और जिला स्तर तक के नेता मौजूद रहेंगे।कार्यक्रम के बाद अमित शाह के दोपहर करीब तीन बजे दिल्ली लौटने का कार्यक्रम निर्धारित है। इस तरह उनका लखनऊ प्रवास लगभग चार घंटे का रहेगा।
तीन सत्रों में होगी बैठक, चुनावी एजेंडे पर रहेगा जोर
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को तीन सत्रों में आयोजित किया जाएगा। दूसरे सत्र में राजनीतिक एजेंडे, विधानसभा चुनाव की तैयारियों और प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही संगठन की गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी।बैठक में यह आकलन किया जाएगा कि पार्टी का संगठन प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कितना मजबूत है और किन स्थानों पर अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है। खासतौर पर कमजोर बूथों और उन क्षेत्रों पर ध्यान देने की रणनीति तैयार की जाएगी, जहां भाजपा को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करनी है।पार्टी की योजना है कि कार्यसमिति में तय होने वाले एजेंडे और रणनीति को जिला, मंडल और बूथ स्तर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

राजनीतिक प्रस्ताव में सरकार की उपलब्धियों को मिलेगी जगह
बैठक में पेश किए जाने वाले राजनीतिक प्रस्ताव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, गरीब कल्याण, सुशासन और संगठनात्मक गतिविधियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।भाजपा की ओर से सरकार के कामकाज और विभिन्न योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। राजनीतिक प्रस्ताव में सरकार के प्रमुख निर्णयों और उपलब्धियों को चुनावी एजेंडे के साथ जोड़कर पेश करने की तैयारी है।विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके जरिए कार्यकर्ताओं को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने और संगठन में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया जाएगा।


पंकज चौधरी की अध्यक्षता में तैयारियों को अंतिम रूप
कार्यसमिति की बैठक की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और प्रदेश सह-प्रभारियों मेधा कुलकर्णी, अनंत ओझा तथा प्रदीप वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।बैठक में कार्यक्रम के एजेंडे और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि पार्टी को जहां कमजोर है, वहां अधिक जोर देने की रणनीति के साथ काम करना होगा। उन्होंने आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए पंजीकरण, भोजन, यातायात और सभागार की सजावट समेत अलग-अलग जिम्मेदारियां तय कीं।प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने आयोजन को अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए पूर्व तैयारी, माइक्रो मैनेजमेंट और टीमवर्क पर जोर दिया।
जिला स्तर तक के पदाधिकारी होंगे शामिल
भाजपा की इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और संगठन के सदस्य शामिल होंगे। इनमें प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह-प्रभारी जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, अनंत ओझा और प्रदीप वर्मा शामिल हैं।इसके अलावा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक को संबोधित करेंगे।कार्यसमिति में विधायक, एमएलसी, 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी, 2022 के विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी, क्षेत्रीय अध्यक्ष और महामंत्री, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष भी शामिल होंगे।इसके साथ ही पार्टी के विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक के पदाधिकारियों, जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों और जिला महामंत्रियों की मौजूदगी रहेगी। इस तरह बैठक में संगठन के विभिन्न स्तरों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर चुनावी तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।
देर रात विनोद तावड़े और पंकज चौधरी ने किया निरीक्षण
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को परखने के लिए भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने देर रात डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया।इस दौरान नेताओं ने सभागार, मंच, पंजीकरण व्यवस्था, बैठक स्थल की सजावट और अन्य तैयारियों का जायजा लिया। संबंधित पदाधिकारियों को व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए।बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों के पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित और सुचारु बनाना है।
मिशन 2027 के लिए संगठन को सक्रिय करने की तैयारी
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की यह बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। अमित शाह की मौजूदगी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन से पार्टी के राजनीतिक और संगठनात्मक एजेंडे को दिशा मिलने की उम्मीद है।बैठक में कमजोर क्षेत्रों की पहचान, बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, सरकार की योजनाओं का प्रचार और कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कार्यसमिति में कौन-से राजनीतिक प्रस्ताव और चुनावी प्राथमिकताएं सामने आती हैं तथा उन्हें जमीन पर उतारने के लिए संगठन किस तरह की जिम्मेदारियां तय करता है।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह बैठक पार्टी की आगे की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों का महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
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