नई दिल्ली अमेरिका में उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में अहम घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने अभियोजन पक्ष के अनुरोध को मंजूर करते हुए मामले में लगाए गए प्रमुख आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। अमेरिकी कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी अदालत के फैसले से जुड़ी रिपोर्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि मामले में जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि एक ‘समझौता कर चुके प्रधानमंत्री’ को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया और देश को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर क्या कहा?
अदाणी मामले में अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस पूरे मामले में ‘जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा’ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि भारत को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में गौतम अदाणी के खिलाफ लंबे समय से चल रही आपराधिक कानूनी कार्रवाई में बड़ा मोड़ आया है। उनके बयान ने इस मामले को एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।हालांकि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप उनके अपने दावे हैं। अमेरिकी अदालत के आदेश में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किसी आपराधिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है। इसलिए पूरे घटनाक्रम को समझते समय राजनीतिक आरोप और अदालत के कानूनी आदेश के बीच अंतर करना जरूरी है।

अमेरिकी कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग के अनुरोध को मंजूरी देते हुए गौतम अदाणी से जुड़े आपराधिक मामले में आरोपों को खारिज कर दिया। यह मामला कथित तौर पर निवेशकों को गुमराह करने और भारत में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोपों से जुड़ा था। अदाणी और अदाणी समूह ने आरोपों से इनकार किया था।अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने के पीछे कई कारण बताए थे। इनमें अधिकार क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां, सबूतों से संबंधित मुश्किलें और यह तथ्य शामिल था कि कथित गतिविधियों का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाहर, विशेष रूप से भारत से संबंधित था। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि मामले को आगे बढ़ाना उसकी मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है।
किन आरोपों पर लगा विराम?
मामले में गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी समूह से जुड़े अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी और वायर फ्रॉड से संबंधित आपराधिक आरोप लगाए गए थे। अदालत द्वारा अभियोजन पक्ष के अनुरोध को मंजूरी दिए जाने के बाद इन आरोपों पर आपराधिक मुकदमे की आगे की प्रक्रिया समाप्त हो गई।महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप खारिज होना अदालत द्वारा आरोपों को गलत साबित करने या आरोपी को तथ्यों के आधार पर निर्दोष घोषित करने के समान नहीं है। जज गाराउफिस ने भी अपने आदेश में इस अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आरोपों को हटाने का फैसला अभियोजन पक्ष के विवेक से जुड़ा है और इसे आरोपों की सच्चाई पर अदालत की राय नहीं माना जाना चाहिए।
क्या अदाणी को अमेरिकी कोर्ट ने ‘बरी’ किया?
यह सवाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण है। कानूनी तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिकी अदालत ने अदाणी को सुनवाई के बाद सभी आरोपों से ‘बरी’ कर दिया। अदालत में आरोपों की मेरिट पर पूरा ट्रायल नहीं हुआ। मामले में न तो गवाहों की पूरी जांच हुई और न ही आरोपों पर अदालत द्वारा अंतिम परीक्षण के बाद कोई दोषमुक्ति का फैसला दिया गया। अदालत ने अमेरिकी न्याय विभाग के अभियोजन वापस लेने के अनुरोध को स्वीकार किया।यानी यह फैसला प्रोसीक्यूशन को समाप्त करने से संबंधित है, न कि आरोपों की सत्यता पर अदालत द्वारा विस्तृत फैसला देने से।
अमेरिकी न्याय विभाग ने केस हटाने की मांग क्यों की?
अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद अभियोजन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था। विभाग की ओर से अधिकार क्षेत्र और सबूतों से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दिया गया।एक प्रमुख तर्क यह भी था कि कथित गतिविधियों का अधिकांश हिस्सा भारत से संबंधित था। ऐसे में अमेरिका में मामले को सफलतापूर्वक साबित करना मुश्किल हो सकता था। विभाग ने यह भी कहा कि मामले को आगे बढ़ाने की संभावना और उससे जुड़े संसाधनों को देखते हुए अभियोजन जारी रखना उसकी प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जज गाराउफिस ने अभियोजन वापस लेने के फैसले पर चिंता भी व्यक्त की थी। हालांकि उन्होंने अंततः न्याय विभाग के अनुरोध को मंजूरी दे दी।
अदाणी ने फैसले पर क्या कहा?
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अदाणी ने निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस फैसले को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं।अदाणी समूह पहले भी अमेरिकी मामले में लगाए गए आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका कहना रहा है कि उसने लागू कानूनों और नियमों के अनुरूप काम किया है।
राहुल गांधी के आरोपों का राजनीतिक महत्व
अदाणी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी लंबे समय से राजनीतिक सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी कोर्ट के ताजा फैसले ने कांग्रेस को एक बार फिर सरकार पर हमला करने का मौका दिया है।राहुल गांधी का ताजा बयान इस मामले को केवल कानूनी घटनाक्रम के रूप में नहीं, बल्कि भारत की राजनीति और सरकार की नीतियों से जोड़कर देखता है। उनका आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत के हितों पर पड़ रहा है।दूसरी ओर अमेरिकी अदालत का आदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ किसी अपराध या कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण नहीं करता। इसलिए राजनीतिक आरोपों को अदालत के फैसले से अलग रखना महत्वपूर्ण है।
क्यों महत्वपूर्ण है अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला?
गौतम अदाणी भारत के बड़े कारोबारी समूहों में से एक के प्रमुख हैं और उनका समूह बंदरगाह, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करता है। ऐसे में अमेरिकी अदालत में चल रहा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा।अब आपराधिक मामले में आरोप खारिज होने के बाद अदाणी समूह पर बने इस विशेष कानूनी दबाव में बड़ी कमी आई है। हालांकि, इस फैसले के राजनीतिक प्रभाव भारत में आने वाले दिनों में देखने को मिल सकते हैं।अमेरिकी अदालत द्वारा गौतम अदाणी और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज किए जाने के बाद भारत में राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं, अदालत का आदेश यह स्पष्ट करता है कि आरोपों को खारिज करने का फैसला अभियोजन समाप्त करने से संबंधित है और इसे आरोपों की सच्चाई पर अदालत की अंतिम राय नहीं माना जाना चाहिए।इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यही है कि अमेरिकी कोर्ट का फैसला अदाणी मामले की आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करता है, लेकिन इससे राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप स्वतः साबित नहीं होते। आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर संसद और भारतीय राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।
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